नैतिक मूल्यों पर सवाल

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Edited By Amrit Vichar
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कोरोना की दूसरी लहर जिस तेज गति से भारत में फैली और पूरे देश को अपने आगोश में ले लिया, उससे पूरी दुनिया में चिंता है। देश में कोरोना वायरस के मामले हर दिन एक नया रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं और गुरुवार को संक्रमण के 4.12 लाख नए मामले दर्ज किए गए तथा करीब चार …

कोरोना की दूसरी लहर जिस तेज गति से भारत में फैली और पूरे देश को अपने आगोश में ले लिया, उससे पूरी दुनिया में चिंता है। देश में कोरोना वायरस के मामले हर दिन एक नया रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं और गुरुवार को संक्रमण के 4.12 लाख नए मामले दर्ज किए गए तथा करीब चार हजार लोगों ने इस महामारी से जान गंवाई। दैनिक मामलों में यह संख्या विश्वभर में सर्वाधिक है। यूनिसेफ ने भारत में कोविड-19 की ‘भयानक’ स्थिति को पूरे विश्व के लिए चेतावनी की घंटी माना है।

सही बात है कि जब तक दुनिया भारत की मदद के लिए कदम नहीं उठाती, तब तक वायरस संबंधी मौतों, वायरस में बदलाव और आपूर्ति में देरी सबंधी प्रतिध्वनि दक्षिण एशिया एवं पूरी दुनिया में सुनाई देगी। साथ ही अमेरिका के सीनेटरों ने बाइडन प्रशासन से भारत को कोविड-19 सहायता तेज करने का आग्रह किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में यदि स्थिति खौफनाक बनी रहती है तो दुनिया की स्थिति भी भयावह बनी रहेगी। यह वैश्विक संकट है। यदि वायरस का स्वरूप बदलता है, तो इसका हर किसी पर प्रभाव होगा। जब तक सभी सुरक्षित नहीं है तो कोई भी सुरक्षित नहीं है। इसलिए हमें कदम उठाने चाहिएं।

महामारी को लेकर विश्व में चिंता है और देश की स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था और बुनियादी ढांचा इस स्थिति से निपटने के लिए संघर्ष कर रहा है। दूसरी ओर देश में कोविड-19 के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली दवाइयां, रेमडिशिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी, दाह संस्कार और एंबुलेंस के लिए अधिक शुल्क वसूलने के मामले भी सामने आ रहे हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि नैतिक मूल्य पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। नैतिक तानाबाना बहुत हद तक विखंडित हो गया है। लोग एक साथ आने की बजाय ऑक्सीजन सिलेंडर, दवाओं और सांद्रकों की जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त हैं। लगता है लोग स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं। इसीलिए सब एक साथ नहीं आ रहे हैं। इस समय केवल दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और बिस्तरों की ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य कर्मियों की भी कमी है। इसलिए सेवानिवृत्त चिकित्सा पेशेवरों, मेडिकल छात्रों या नर्सिंग छात्रों की सेवायें मौजूदा स्थिति में सहायता प्रदान करने के लिए ली जानी चाहिए।

कालाबाजारी करने वालों व श्मशान और कब्रिस्तान में मनमाना शुल्क वसूलने वालों के विरुद्ध कड़ी व त्वरित कार्रवाई किए जाने की जरूरत है। जरूरत इस बात की भी है कि देश के स्वास्थ्य ढांचे को दुरूस्त करने में केंद्र व राज्य मिलकर काम करें व हालात नियंत्रण में रहे इसके लिए अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।