निराश अर्थव्यवस्था

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कोरोना की पहली लहर में दुनियावीं जरूरतों और अर्थव्यवस्था के नजरिए से भारत लड़खड़ा गया था। जबकि दूसरी लहर में जान का संकट भयावह रूप से सामने आ रहा है। इस बार जान और जहान दोनों नजरिए से भारत कठिन चक्रव्यूह में फंस चुका है। कोरोना की दूसरी लहर को अभी कुछ ही वक्त हुआ …

कोरोना की पहली लहर में दुनियावीं जरूरतों और अर्थव्यवस्था के नजरिए से भारत लड़खड़ा गया था। जबकि दूसरी लहर में जान का संकट भयावह रूप से सामने आ रहा है। इस बार जान और जहान दोनों नजरिए से भारत कठिन चक्रव्यूह में फंस चुका है। कोरोना की दूसरी लहर को अभी कुछ ही वक्त हुआ है और भारतीय अर्थव्यवस्था के बुरे दिन अभी से नजर आने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक ने अभी से भारत को 1.25 अरब डॉलर के नुकसान का अंदेशा जताया है।

देश का उत्पादन और सेवा क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकानॉमी यानी सीएमआईई के मुताबिक कई राज्यों में लॉकडाउन और अन्य पाबंदियों के चलते बेरोजगारी दर आठ प्रतिशत पर पहुंच गई है जो चार महीने में सबसे अधिक है। एक सर्वे के मुताबिक भावी बेहतरी को लेकर शहरी उपभोक्ताओं का भरोसा रोजगार, व्यक्तिगत वित्त, अर्थव्यवस्था और निवेश के मोर्चे पर कम हुआ है। आने वाले वर्ष के लिए सामान्य आर्थिक स्थिति और रोजगार की स्थिति पर उपभोक्ताओं की उम्मीद भी निराशावादी है।

परिवारों की धारणा पर प्रतिकूल असर देखा जा रहा है। चारों तरफ पीड़ा एवं वेदना का माहौल है। यह दीर्घकालिक खुशहाली को लेकर परिवारों में फैली बेचैनी के रूप में झलकता है। चारों तरफ संक्रमण, किल्लत, डर एवं मौत का मातम है। बीते तीन हफ्तों में उपभोक्ता धारणा खासकर प्रभावित हुई है। उपभोक्ता धारणा सूचकांक 18 अप्रैल को खत्म हफ्ते में 4.3 फीसदी गिर गया और फिर 25 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 4.5 फीसदी और गिर गया। गत 2 मई को खत्म हुए हफ्ते में उपभोक्ता धारणा सूचकांक 5.4 फीसदी और गिर गया।

इस तरह साप्ताहिक सूचकांक नवंबर 2020 के बाद के निम्नतम स्तर पर आ चुका है। उपभोक्ता धारणा सूचकांक अप्रैल में 3.8 फीसदी गिरा है। यह मई 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है। ऐतिहासिक मानदंडों से भी देखें तो यह असामान्य गिरावट है। लोग इस बात को लेकर फिक्रमंद हैं कि अगले 12 महीनों में उनकी आय और अर्थव्यवस्था की हालत कैसी होगी? इस महीने में इस सूचकांक के तीनों घटकों में गिरावट आई।

उपभोक्ता अपेक्षा सूचकांक अप्रैल 2021 में 4.5 फीसदी गिर गया जो कि एक बड़ी गिरावट है। ऐसे में छोटे कारोबारों और व्यक्तिगत कर्जदारों की मदद की जानी चाहिए। इससे असंगठित क्षेत्र के छोटे कारोबारों को भी मदद मिलेगी। क्योंकि आर्थिक बाधाओं से इनके ही सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका है।