बरेली: कोरोना की दूसरी लहर ढा रही कहर, कालाबाजारी ने बढ़ाईं मुश्किलें
बरेली, अमृत विचार। कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के शासन व जिला प्रशासन लाख दावे करे, लेकिन हकीकत इससे जुदा है। ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयां ही नहीं अब तो ऑक्सी फ्लो मीटर की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। अब तक साल में पांच से दस …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के शासन व जिला प्रशासन लाख दावे करे, लेकिन हकीकत इससे जुदा है। ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयां ही नहीं अब तो ऑक्सी फ्लो मीटर की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। अब तक साल में पांच से दस ऑक्सी फ्लो मीटर की बिक्री होती थी। अचानक बिक्री बढ़ने पर दुकानदार इसके मनमाने रेट वसूल रहे हैं। कोई दो हजार तो कोई चार हजार रुपये मांग रहा है।
कोरोना संक्रमण की चपेट में आने पर जब किसी मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत होती है तब ऑक्सी फ्लो मीटर के बिना सिलेंडर काम नहीं करता। बहुत से लोग ऐसे हैं जो सिलेंडर की व्यवस्था कर लेते हैं, लेकिन बाद में उनको इसकी जानकारी होती है।
श्यामगंज रोड स्थित अमृत गैस एजेंसी पर ऑक्सीजन सिलेंडर की रिफिल कराने पहुंचे दानिश ने बताया कि वह पहले ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए मारामारी सुन रहे थे, लेकिन जब पिता का ऑक्सीजन स्तर गिरने पर बाजार में ऑक्सी फ्लो मीटर लेने पहुंचे तो कोई दो हजार तो कोई चार हजार रुपये मांगने लगा। जबकि, अच्छी गुणवत्ता का एक ऑक्सी फ्लो मीटर की असल कीमत एक हजार रुपये है।
नॉर्मल तो पांच सौ से सात सौ रुपये में ही मिल जाते हैं लेकिन अस्पतालों, मेडिकल संचालकों के साथ सर्जिकल सामान बेचने वालों ने आपदा को अवसर में बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस पेशे से जुड़े लोग बताते हैं कि बार-बार खोलने कसने पर ऑक्सी फ्लो मीटर बहुत दिनों तक नहीं चलता। उसे बहुत ही सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए तभी लंबे समय तक इसे इस्तेमाल में लिया जा सकता है।
…तो इसलिए बढ़ा दिए दाम
कोरोना की दूसरी लहर में अचानक ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग बढ़ी तो ऑक्सी फ्लो मीटर की कमी होने लगी। कई दुकानों पर स्टाक रखा था। उन्होंने आपदा को अवसर में बदलने को रेट बढ़ा दिए। इधर, कैमिस्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अवनेश मित्तल ने बताया कि ऑक्सी फ्लो मीटर की अभी तक बहुत कम जरूरत पड़ती थी। एक-एक दुकानदार साल में पांच से दस ऑक्सी फ्लो मीटर की बिक्री करता था, लेकिन अब एक साथ मांग बढ़ गई है। कंपनी इतनी सप्लाई कर नहीं पा रही है। इसकी वजह से भी दाम बढ़े हैं। इस वक्त अगर कोई दोगुना दाम वसूल रहा है तो यह शर्मनाक है।
25 हजार जमा करो, सिलेंडर ले जाओ
चालीस हजार रुपये में ऑक्सीजन सिलेंडर ब्लैक करने का मामला अभी थमा भी नहीं कि अब शाहजहांपुर रोड स्थित गैस एजेंसी पर भी इसी तरह कालाबाजारी करने का मामले सामने आया है। यहां भी 25 से 30 हजार रुपये जमा कर सिलेंडर देने की बात कही जा रही है। इतना ही नहीं ऑक्सीजन रिफलिंग में भी खेल चल रहा है। सीबीगंज निवासी अब्दुल अंसारी ने बताया कि वह दो दिन पहले खाली सिलेंडर पता करने पहुंचे तो उनसे 25 हजार रुपये जमा करने की बात कही। कम रुपये जमा करने पर सिलेंडर देने से इंकार कर दिया।
मुकदमा दर्ज होते ही पहुंचने लगी सिफारिशें
ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी करने के मामले में शहर के बड़े व्यापारी के करीबी पारस गुप्ता के खिलाफ प्रेमनगर थाने में मुकदमा दर्ज होते ही सिफारिशों का दौर शुरू हो गया है। पारस गुप्ता ने चालीस हजार रुपये में ऑक्सीजन सिलेंडर दिलाने की बात एक न्यूज पोर्टल पर लाइव टेलीकास्ट के दौरान कही थी। रविवार को दिन में भी इसको लेकर शहर में चर्चाएं रहीं तो शाम को आनन-फानन में जालसाजी और आपदा अधिनियम में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इधर, सूत्रों की मानें तो इस प्रकरण को मैनेज करने के लिए सिफारिशों का दौर शुरू हो गया है क्योंकि पारस गुप्ता शहर के एक बड़े व्यापारी नेता का करीबी रिश्तेदार है। हालांकि नामजद मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पुलिस की गिरफ्त से आरोपी ऑक्सीजन विक्रेता दूर है।
