टीकाकरण की धीमी गति
कोरोना महामारी से देश में स्वास्थ्य व्यवस्था पस्त हो चुकी है। टीकाकरण की गति धीमी है। जबकि कोविड-19 महामारी के खिलाफ जंग में जीत के लिए टीकाकरण मुहिम को तेज करने की जरूरत है। सभी को टीका लगना चाहिए और टीकाकरण के खर्च का वहन केंद्र सरकार को करना चाहिए। विपक्षी दलों का आरोप है …
कोरोना महामारी से देश में स्वास्थ्य व्यवस्था पस्त हो चुकी है। टीकाकरण की गति धीमी है। जबकि कोविड-19 महामारी के खिलाफ जंग में जीत के लिए टीकाकरण मुहिम को तेज करने की जरूरत है। सभी को टीका लगना चाहिए और टीकाकरण के खर्च का वहन केंद्र सरकार को करना चाहिए। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया है। उसने 18 से 44 साल तक के करोड़ों लोगों के टीकाकरण के खर्च का बोझ राज्यों पर डाल दिया है।
केंद्र सरकार विपक्ष शासित राज्यों के साथ लगातार भेदभाव कर रही है। सच है कि देश में कोरोना महामारी की गंभीर स्थिति को भांपने में चूक हुई है। देश में 16 जनवरी से टीकाकरण चल रहा है। केंद्र की लचर तैयारी से लग रहा था कि देश में टीके की पर्याप्त खुराकों का अभाव रहेगा। वैसे पर्याप्त संख्या में टीके उपलब्ध न होने से अधिकांश देश परेशान हैं। इनमें कनाडा और यूरोपीय संघ जैसे समृद्ध देश भी शामिल हैं। भारत भी टीकों के अभाव से गुजर रहा है। जबकि भारत दुनिया को सस्ते दाम वाले टीकों का आपूर्तिकर्ता रहा है। जहां तक भारत की खराब स्थिति का सवाल है तो सरकार ने तीन बड़ी गलतियां की हैं।
पहली, उसने अपने सभी विकल्पों को दो खांचों में ही बांट दिया जबकि छोटी आबादी वाले देश भी कई टीका निर्माताओं को ऑर्डर देकर अपना जोखिम कम करने में लगे हुए थे। इससे भी बड़ी बात यह रही कि दोनों निर्माताओं के पास इतनी बड़ी मात्रा में उत्पादन की क्षमता होने को नहीं परखा गया। तीसरी गलती यह थी कि देश की कुल जरूरतों के हिसाब से ऑर्डर नहीं दिए गए।
इस बीच हमारे टीका निर्माताओं ने भी गलत गणना की और टीके के उत्पादन के लिए जरूरी कच्चे माल का जिम्मा सिर्फ गिनी-चुनी अमेरिकी कंपनियों को ही दे दिया। वर्ष 2020 की शुरुआत में ही सभी टीका निर्माताओं को पता चल गया था कि महामारी काल में एक या दो आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने से परेशानी ही होगी। इसके बावजूद भारतीय टीका उत्पादकों ने इस खतरे को कम करने के प्रयास नहीं किए। अब रूस के स्पूतनिक-वी टीकों की खुराक भी भारत को मिल रही है। हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि कोविड-19 रोधी टीके की 17 करोड़ खुराकें देकर भारत ने दुनिया में सबसे तेजी से टीकाकरण किया है।
मंत्रालय ने कहा कि इस आंकड़े तक पहुंचने में चीन को 119 दिन जबकि अमेरिका को 115 दिन लगे। महामारी के नियंत्रण एवं प्रबंधन की पांच सूत्रीय रणनीति का टीकाकरण एक अभिन्न हिस्सा है। इसलिए विपक्ष को इस लड़ाई में केंद्र सरकार के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता जतानी होगी। यह सुनिश्चित करना होगा कि टीके से कोई छूट नहीं जाए।
