गांवों की ओर

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Edited By Amrit Vichar
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कोरोना महामारी ने गांवों की ओर रुख कर लिया है। शहरों के बाद अब गांवों और कस्बों से भी कोरोना संक्रमण से जुड़ी खबरें मिल रही हैं। कोरोना पर काबू पाने के लिए चिकित्सक, वैज्ञानिक और शोध कर्ता लगातार काम कर रहे हैं। इन सब के बीच कहा जा रहा है कि कोरोना की तीसरी …

कोरोना महामारी ने गांवों की ओर रुख कर लिया है। शहरों के बाद अब गांवों और कस्बों से भी कोरोना संक्रमण से जुड़ी खबरें मिल रही हैं। कोरोना पर काबू पाने के लिए चिकित्सक, वैज्ञानिक और शोध कर्ता लगातार काम कर रहे हैं। इन सब के बीच कहा जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर आना भी तय है।

तीसरी लहर को लेकर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन ने देश को आगाह किया है। यह लहर कब आएगी, इसका निश्चित समय उन्होंने नहीं बताया। अलबत्ता विशेषज्ञ सितंबर-अक्बटूर का अनुमान लगा रहे हैं। प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा है कि सावधानी और सर्तकता से तीसरी लहर को काबू किया जा सकता है। फिलहाल देश कोविड की दूसरी लहर के घातक और जानलेवा थपेड़े झेल रहा है।

संक्रमण का प्रतिदिन का आंकड़ा दुनिया के सभी देशों से ज्यादा है। कोरोना के भय से कोई परिवार अछूता नहीं है और सरकार के प्रयास लोगों को आश्वस्त नहीं कर पा रहे हैं। सरकार समर्थक सोशल मीडिया पर लोगों से सकारात्मक होने का आग्रह कर रहे हैं, लेकिन उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि दिन के हर पहर जब किसी न किसी प्रियजन या परिचित के न रहने की खबर मिलती हो, तब सकारात्मक कैसे रहा जा सकता है।

विशेषज्ञ लगभग एक राय हैं कि यह कोविड के सामुदायिक संक्रमण का ही दौर है। गांवों में कोरोना की टेस्टिंग भी नगण्य है। लोग अब भी जागरूक नहीं हैं। क्या लाकडाउन में सड़कों पर जुट रही भीड़ के रहते कोरोना की तीसरी लहर को थामा जा सकता है? तीसरी लहर आने से पहले ही अधिकतम लोगों में टीकाकरण करना होगा। लेकिन टीकों की भी भारी कमी है। देश में टीकों का युद्ध स्तर पर निर्माण बढ़ाने की जरूरत है। अगले कुछ महीनों में सभी को टीका लगाए जाने की नीति तैयार की जानी चाहिए।

इस संबंध में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का यह सुझाव विचारणीय है कि केवल दो कम्पनियों को ही टीके का निर्माण नहीं करना चाहिए। केंद्र सरकार को उनका ‘फॉर्मूला’ खरीदना चाहिए और उसे अन्य कम्पनियों को देना चाहिए। मांग और आपूर्ति के बीच समन्वय बनाए रखना बहुत जरूरी है।

भारत ने अन्य देशों को मदद करने से पहले टीकों का पर्याप्त बफर क्यों नहीं बनाया? यह सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रमों के एक लंबे और सफल इतिहास वाले देश के लिए शर्मनाक है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ग्रामीण इलाकों में कोरोना संक्रमण को काबू में करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों की तारीफ की है।