वायरस या हथियार

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

कोरोना संक्रमण की शुरुआत से ही इस बात को लेकर बहस चल रही है कि दुनिया में कहर बरपा रहा वायरस चीन से निकला है। वैज्ञानिकों का एक वर्ग विषाणु को कृत्रिम मानता रहा है। यह शक और गहरा गया, जब चीन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को अपने यहां जांच कराने को टालता रहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन …

कोरोना संक्रमण की शुरुआत से ही इस बात को लेकर बहस चल रही है कि दुनिया में कहर बरपा रहा वायरस चीन से निकला है। वैज्ञानिकों का एक वर्ग विषाणु को कृत्रिम मानता रहा है। यह शक और गहरा गया, जब चीन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को अपने यहां जांच कराने को टालता रहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम को भी चीन में जांच करने से रोका जाता रहा। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहते रहे हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग को हाल में प्राप्त दस्तावेजों के हवाले से दावा किया गया है कि चीन के वैज्ञानिकों ने कोविड-19 महामारी से पांच साल पहले कथित तौर पर कोरोना वायरस को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के बारे में जांच की थी और उन्होंने तीसरा विश्व युद्ध जैविक हथियार से लड़ने का पूर्वानुमान लगाया था। पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के दस्तावेजों में दर्शाया गया कि जैव हथियार हमले से दुश्मन के चिकित्सा तंत्र को ध्वस्त किया जा सकता है। दस्तावेजों में अमेरिकी वायुसेना के कर्नल माइकल जे. के कार्यों का भी जिक्र किया गया है, जिन्होंने इस बात की आशंका जताई थी कि तीसरा विश्व युद्ध जैविक हथियारों से लड़ा जा सकता है।

सांसद टॉम टगेनधट और आस्ट्रेलियाई राजनेता जेम्स पेटरसन ने कहा कि इन दस्तावेजों ने कोविड-19 की उत्पत्ति के बारे में चीन की पारदर्शिता को लेकर चिंता पैदा कर दी है। सवाल उठता रहा है कि जिस चीन से यह वायरस चला है, उसने इतनी जल्दी इससे कैसे मुक्ति पा ली। क्या उसने जैविक हमले की तर्ज पर इससे बचाव के लिए पहले से ही तैयारी कर रखी थी? कोरोना संकट के भयावह दौर में जब दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाह हुई है, चीन की आर्थिक प्रगति ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

वास्तविकता क्या है और यदि चीन दोषी है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होनी चाहिए। विडंबना यह है कि इस महामारी से मुकाबले की अगुवाई करने वाली संयुक्त राष्ट्र की नोडल एजेंसी विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका सच्चाई से पर्दा हटाने में संदिग्ध रही है। बहरहाल विश्व स्वास्थ्य संगठन को नए सिरे से जांच करनी चाहिए और चीन को जांच को पारदर्शी बनाए रखने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए।

आज पूरी दुनिया महामारी से लड़ते हुए भविष्य की महामारियों से निपटने के सबक सीखने में भी लगी है। अभी भी यही सवाल कि कोरोना वायरस प्राकृतिक है या फिर जैविक हथियार बनाने के मकसद से लैब में तैयार किया गया है, लोग इसे लेकर उद्वेलित हैं।