लड़ेंगे और जीतेंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर से मुकाबले के लिए सरकार युद्धस्तर पर काम कर रही है। दुश्मन अदृश्य और बहुरूपिया है। संकट के इस समय में भी कुछ लोग मानवता के खिलाफ काम करते हुए आवश्यक दवाइयों व संसाधनों की कालाबाजारी में लगे हैं। प्रधानमंत्री का यह …
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर से मुकाबले के लिए सरकार युद्धस्तर पर काम कर रही है। दुश्मन अदृश्य और बहुरूपिया है। संकट के इस समय में भी कुछ लोग मानवता के खिलाफ काम करते हुए आवश्यक दवाइयों व संसाधनों की कालाबाजारी में लगे हैं। प्रधानमंत्री का यह कहना कि भारत हिम्मत हारने वाला देश नहीं है, हम लड़ेंगे और जीतेंगे, देशवासियों का मनोबल बढ़ाने वाला है।
प्रधानमंत्री ने गांव में भी तेजी से फैल रहे संक्रमण पर भी चिंता जताई। कहा कि इसकी रोकथाम में पंचायती राज व्यवस्था जरुरी सहयोग करें। नि:संदेह प्रधानमंत्री की चिंता महामारी की विकट स्थिति की ओर इशारा करती है। ऐसे में शहरों के मुकाबले गांवों से संक्रमण के ज्यादा मामले सामने आना नि:संदेह डराने वाला है। भय इसलिए भी क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा ढांचा कमोबेश सभी राज्यों में चरमराया हुआ है। ग्रामीण स्तर पर अपेक्षित जागरूकता नहीं लाई जा सकी है। ऐसे में जब देश का चिकित्सा तंत्र लड़खड़ाता नजर आ रहा है, तब जागरूकता ही बचाव का पहला उपाय हो सकता है।
थोड़ी सी भी कोताही बड़ी समस्या पैदा कर सकती है। गांवों में हालात बदले जरूर हैं, मगर उम्मीदों के अनुरूप नहीं। अशिक्षा, रूढ़ियां और पुरातन सोच इसमें बाधक रही हैं। लेकिन ग्रामीण जनजीवन की सहजता-सरलता के चलते कोविड-19 से बचाव के उन उपायों का सख्ती से पालन नहीं हो पाया है, जिनसे संक्रमण की चेन तोड़ी जा सकती थी।
अब ग्रामीणों की जागरूकता और स्वयं सहायता समूहों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। इस संकट में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, जो ग्रामीणों को कोविड प्रोटोकाल के अनुपालन के लिये प्रेरित करें। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों से वार्ड स्तर पर तीन से पांच सदस्यीय ‘कोरोना योद्धा दल’ गठित करने का आह्वान किया है। साथ ही लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाने के लिये वैक्सीनेशन केंद्रों तक ला सकते हैं।
मरीजों को अस्पताल में भर्ती न होना पड़े, इसके लिये पहले ही प्रयास किये जाने जरूरी हैं। इससे कई लोगों की जान बचाने के प्रयास सार्थक हो सकते हैं। सही में गांवों में ऐसी व्यवस्था हो कि संक्रमण से पीड़ितों के लिये प्राथमिक जांच व सामान्य उपचार की उपलब्धता सुनिश्चित हो। संक्रमण से मुकाबले के लिये सामूहिक प्रयास किये जाने की जरूरत है। यह वक्त जांच बढ़ाने, आइसोलेशन केंद्र खोलने, चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा टीकाकरण में तेजी लाने का है। महामारी के मुकाबले के लिए जागरूकता और वैज्ञानिक सोच होना भी जरूरी है। संसाधनों की मौजूदा स्थिति में बचाव ही उपचार है।
