व्यावहारिक टीका नीति
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में नागरिकों को महसूस हो गया है कि कोरोना महामारी से बचाव के लिए टीका लगवाना जरूरी है। इसलिए पहले चरण में जो लोग टीकाकरण को लेकर लापरवाही बरत रहे थे, वे भी अब टीका लगवाने को आगे आ रहे हैं। टीकाकरण अभियान की सफलता के लिए जन-जागरूकता जरूरी है। …
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में नागरिकों को महसूस हो गया है कि कोरोना महामारी से बचाव के लिए टीका लगवाना जरूरी है। इसलिए पहले चरण में जो लोग टीकाकरण को लेकर लापरवाही बरत रहे थे, वे भी अब टीका लगवाने को आगे आ रहे हैं। टीकाकरण अभियान की सफलता के लिए जन-जागरूकता जरूरी है। देश में टीकाकरण अभियान के तहत अब तक टीके की 18.22 करोड़ खुराकें दी गई हैं। 66.76 प्रतिशत खुराकें 10 राज्यों में दी गई हैं।
टीकों की कमी के आरोपों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को कहा कि राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के पास अब भी टीके की 1.84 करोड़ से अधिक खुराक हैं तथा करीब 51 लाख खुराक शीघ्र आने वाली हैं, जो अगले तीन दिनों में उन्हें दी जाएंगी। याद रखना होगा कि जब तक हम देश की सत्तर-अस्सी प्रतिशत जनसंख्या को टीका नहीं लगा लेते तब तक नई-नई लहरों का सामना करते रहना हमारी नियति रहेगा। कई देशों में 18 साल से कम आयु वालों के लिए भी टीकाकरण शुरु किया जा चुका है। लेकिन भारत में टीकाकरण को लेकर समय पर सही फैसले नहीं लिए गए।
दो कंपनियों के टीकों के दम पर सरकार ने जनता को यह भरोसा दिलाना चाहा कि देश कोरोना से लड़ाई जीत लेगा। पहले स्वास्थ्यकर्मियों और बुजुर्गों, फिर 45 साल से ऊपर के लोगों, उसके बाद 18 साल से अधिक के लोगों के टीकाकरण के लिए सरकार ने मंजूरी दी। अच्छी बात है कि सरकार ने टीकाकरण का दायरा लगातार बढ़ाया, लेकिन इतनी आबादी के लिए टीकों का इंतजाम नहीं किया। बल्कि नोटबंदी की तरह इस बार टीकों के लिए लोगों को कतार में खड़ा करवा दिया।
बहरहाल, एक बड़ा सवाल ये भी है कि आखिर किसलिए सरकार ने केवल दो कंपनियों के टीकों पर देश को निर्भर रखा। काफी दबाव के बाद स्पूतनिक वी को मंजूरी मिली और अब शायद जानसन एंड जानसन के टीके को भी मंजूरी मिल जाए। लेकिन भारत में जब कुछ और ऐसे प्रतिष्ठान हैं, जहां टीके को विकसित करने का काम किया जा सकता है, तो फिर सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक पर सरकार निर्भर क्यों है।
जब इस महामारी को रोकने के लिए टीकाकरण भारत सरकार की समग्र नीति का अभिन्न हिस्सा है तो सरकार को व्यावहारिक, उदार व संवेदनशील टीका नीति के साथ आगे आना चाहिए। भारत में टीकों के विकास का लंबा इतिहास है। जल्द से जल्द टीकों के निर्माण में देश की श्रेष्ठ विज्ञान संस्थाओं को जोड़ा जाना चाहिए। ताकि जनता को टीकाकरण के जरिए सुरक्षित किया जा सके।
