खतरा अभी टला नहीं
कोरोना संक्रमण की रफ्तार में थोड़ी कमी आई है, यह राहत की बात है। पिछले 24 घंटों के दौरान 2.81 लाख नए मामले सामने आए हैं। पिछले 27 दिन में एक दिन में सामने आए ये सबसे कम नए मामले हैं। करीब 3.78 लाख लोगों ने इस महामारी को मात दी है। देश में बीमारी …
कोरोना संक्रमण की रफ्तार में थोड़ी कमी आई है, यह राहत की बात है। पिछले 24 घंटों के दौरान 2.81 लाख नए मामले सामने आए हैं। पिछले 27 दिन में एक दिन में सामने आए ये सबसे कम नए मामले हैं। करीब 3.78 लाख लोगों ने इस महामारी को मात दी है। देश में बीमारी से ठीक होने वाले मरीजों की राष्ट्रीय दर 84.81 प्रतिशत है। साफ है कि यदि महामारी से बचाव की कोशिशों में लापरवाही न बरती जाए तो इससे छुटकारा मिलने के हालात बनने लगेंगे। हालांकि महामारी का जोखिम अभी कम नहीं हुआ है।
देश मे अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से हालात काबू से बाहर हो गए थे। रोजाना संक्रमित होने वालों की संख्या चार लाख तक पहुंच गई थी। जो विश्व के किसी भी देश के मुकाबले सबसे अधिक थी। संक्रमण की दूसरी लहर के भयानक होने को लेकर विशेषज्ञ लंबे समय से सचेत करते आ रहे थे। परंतु चेतावनियों की अनदेखी की गई और दूसरी लहर से निपटने की व्यापक तैयारियां नहीं की गईं।
देश में पांच राज्यों के चुनावों के दौरान होने वाली बड़ी-बड़ी रैलियों व उत्तर प्रदेश में कराए गए पंचायत चुनाव के कारण संक्रमण ने रफ्तार पकड़ ली और सरकारों की लापरवाही की कीमत बड़ी संख्या में लोगों को जान के रुप में चुकानी पड़ी। देश में स्वास्थ्य तंत्र लड़खड़ा गया। अस्पतालों में बिस्तरों व दवाओं तक की कमी पड़ गई। अदालतों ने सरकारों की लापवाही की तुलना नरसंहार से की। अभी भी दूसरी लहर का संकट बना हुआ है। संक्रमण तेजी से गांवों में फैल रहा है। कोरोना संकट से तहस-नहस हुई अर्थव्यवस्था ने लाखों लोगों के रोजगार छीन लिए।
आर्थिक के अलावा यह एक बड़ा मानवीय संकट भी है। देश में ऐसे परिवारों की संख्या भी कम नहीं होगी, जिनके परिवार का कमाऊ सदस्य महामारी में चला गया। ऐसे अनेक बच्चे हैं, जिन्होंने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया। इस मामले में सत्ताधीशों से संवेदनशील व्यवहार की उम्मीद की जा सकती है। मध्य प्रदेश व दिल्ली के मुख्यमंत्री के उम्मीद जगाने वाले बयान सामने आए हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महामारी में अनाथ हो गए बच्चों को हर माह पांच हजार रुपये की पेंशन देने की घोषणा की है।
वहीं केजरीवाल सरकार ने भी अनाथ हुए बच्चों की शिक्षा व जीवन-यापन का खर्चा उठाने की घोषणा की है। उम्मीद है कि सरकारें ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी। बेहतर होगा कि केंद्रीय स्तर पर ऐसी योजनाएं बनें और राज्यों के साथ बेहतर तालमेल के साथ उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
