समय की आवश्यकता
आंकड़ों में कोरोना केस भले ही कम हो रहे हैं लेकिन कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या अब भी काफी ज्यादा है। देश में कोरोना से एक दिन में सबसे ज्यादा 4,329 रिकॉर्ड मौतें हुईं। देश में अब तक मरने वालों की संख्या पौने तीन लाख के करीब हो चुकी है और कुल संक्रमितों …
आंकड़ों में कोरोना केस भले ही कम हो रहे हैं लेकिन कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या अब भी काफी ज्यादा है। देश में कोरोना से एक दिन में सबसे ज्यादा 4,329 रिकॉर्ड मौतें हुईं। देश में अब तक मरने वालों की संख्या पौने तीन लाख के करीब हो चुकी है और कुल संक्रमितों की संख्या ढाई करोड़ हो गई है। मंगलवार को महामारी से प्रभावित नौ राज्यों के 46 जिलाधिकारियों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिलों में कोरोना के हालात की समीक्षा की।
यह बातचीत देश में महामारी के कारण उपजे माहौल की गंभीरता व संवेदनशीलता को दर्शाती है। कोविड से लड़ाई का सबसे मजबूत तरीका टीकाकरण है। जबकि इसे लेकर केंद्र व विभिन्न राज्य सरकारों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि जो भी भ्रम हैं, उन्हें दूर करने के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे। टीकाकरण के लिए राज्यों को 15 दिन के अग्रिम कार्यक्रम दिए जाने चाहिएं। महामारी ने हर क्षेत्र व तबके को प्रभावित किया है, फिर भी ग्रामीण, दूर दराज के क्षेत्रों की ओर बहुत ध्यान देना होगा।
देश की चिंता कुछ राज्यों के ग्रामीण इलाकों में तेजी से फैल रहा संक्रमण है। विडंबना यही है कि देश में कोरोना संक्रमण की पहली लहर से ही सारी सुविधाएं शहरों पर केंद्रित रही हैं। ऐसे में यह उम्मीद करना बेमानी है कि इस महामारी के दौर में ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा इस चुनौती का मुकाबला कर सकेगा। यही वजह है कि आईसीएमआर के निर्देशों के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गांवों में संक्रमण रोकने के लिये नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
कहना कठिन है कि लगातार गंभीर होती जा रही स्थिति में ये दिशा-निर्देश किस हद तक कारगर साबित होंगे। ये प्राथमिक उपाय क्या गंभीर होती स्थिति में मददगार होंगे? जो व्यवस्थाएं हमें पिछली लहर के दौरान करनी चाहिए थीं, वो हम दूसरी लहर के पीक पर आने पर कर रहे हैं। चिंता इस बात की भी है कि केंद्र सरकार के वैज्ञानिक तीसरी लहर के आने की बात भी कर रहे हैं। इन दिनों सिंगापुर में कोरोना का नया वेरिएंट बच्चों को अपना शिकार बना रहा है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ये भारत में तीसरी लहर के रूप में आ सकता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर निषिद्ध क्षेत्र बनाने, अधिकाधिक जांच करने तथा जनता तक सही एवं पूर्ण जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया जाना चाहिए। वक्त की जरूरत है कि समय रहते ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को इतने मजबूत ढंग से तैयार किया जाए कि उसके सामने तीसरी-चौथी कोई भी लहर आए, जन धन की हानि न हो।
