नई चुनौती

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Edited By Amrit Vichar
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महामारी में अग्रिम मोर्चे पर तैनात चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों से शुक्रवार को बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर ने स्वास्थ्य प्रणाली को दबाव में डाल दिया है। अभी कई मोर्चों पर कोरोना से निपटना होगा। कोरोना के खिलाफ लड़ाई लंबी चलेगी। उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ …

महामारी में अग्रिम मोर्चे पर तैनात चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों से शुक्रवार को बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर ने स्वास्थ्य प्रणाली को दबाव में डाल दिया है। अभी कई मोर्चों पर कोरोना से निपटना होगा। कोरोना के खिलाफ लड़ाई लंबी चलेगी। उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में इन दिनों ब्लैक फंगस की एक और नई चुनौती भी सामने आई है। इससे निपटने के लिए जरूरी सावधानी बरतनी है और व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है।

कोरोना की तीसरी लहर न जाने किस रूप में, किस तरह से सामने आएगी और सरकार उससे निपटने की क्या तैयारी कर रही है, ऐसे सवालों के जवाब अभी मिलना बाकी है। मगर इससे पहले नई बीमारी ब्लैक फंगस का खौफ देश पर छा रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से कहा है कि ब्लैक फंगस को महामारी कानून के तहत अधिसूचित करें और सभी केस रिपोर्ट किए जाएं। यानि अब सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को इस रोग की जांच और इलाज के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के निर्देशों का पालन करना होगा। राजस्थान और तेलंगाना पहले ही ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश में इसे अधिसूचित करने के निर्देश मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने दिए हैं।

प्रधानमंत्री ने ‘जहां बीमार, वहीं उपचार’ नारा दिया है, जबकि कोरोना की दूसरी लहर ने देश में स्वास्थ्य सुविधाओं का सच खोलकर रख दिया है। देश के कई सरकारी अस्पताल कोरोना के इलाज में संसाधनों से जूझते नजर आए। सच तो यह है कि सामान्य दिनों में भी देश की सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का स्तर निम्नस्तरीय रहा है। जो मजबूर होते हैं, जिनके पास महंगे इलाज के लिए साधन नहीं होते, वे मरीज ही सरकारी अस्पतालों का रुख करते हैं।

आंकड़ों के जरिए यह बताने की कोशिश हो रही है कि कोरोना को लेकर हालात नियंत्रित हैं। लेकिन इस नियंत्रण का सच ये है कि कोरोना से ठीक हुए मरीजों पर ब्लैक फंगस का नया खतरा मंडरा रहा है। ब्लैक फंगस के इलाज और दवा के लिए अभी से मारामारी देखी जा रही है। इसके इलाज में एंटी फंगल मेडिसिन एम्फोटेरेसिन-बी इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। जिसकी उपलब्धता अभी सब को नहीं है और कालाबाजारी की तैयारी हो चुकी होगी। ब्लैक फंगस के इलाज में आंख के सर्जन, न्यूरोसर्जन, जनरल सर्जन, डेंटल सर्जन और ईएनटी स्पेशलिस्ट की जरूरत होगी। इसलिए सरकार को देशव्यापी स्तर पर यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि इस नई बीमारी की दवाओं और संबंधित चिकित्सकों तक जनता की पहुंच आसान हो।