सबकी सुरक्षा जरूरी

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Edited By Amrit Vichar
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वैश्विक महामारी कोरोना स्वरूप बदल कर फल-फूल रही है। भारत, दक्षिण अमेरिका और अन्य क्षेत्रों में कोविड-19 मामलों की ताजा वृद्धि से लोग सचमुच सांसों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन में कहा कि दुनिया वायरस के खिलाफ युद्ध लड़ रही है, हमें युद्ध …

वैश्विक महामारी कोरोना स्वरूप बदल कर फल-फूल रही है। भारत, दक्षिण अमेरिका और अन्य क्षेत्रों में कोविड-19 मामलों की ताजा वृद्धि से लोग सचमुच सांसों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन में कहा कि दुनिया वायरस के खिलाफ युद्ध लड़ रही है, हमें युद्ध परिदृश्य के नियमों के हिसाब से अपने हथियारों से लड़ना होगा। परंतु हम अब भी वह नहीं कर रहे हैं। गुतारेस की यह बात सच है।

कोवैक्स को जहां अब तक पूरे विश्व में 17 करोड़ टीके पहुंचा देने चाहिए थी, लेकिन टीकाकरण को लेकर राष्ट्रवाद, सीमित उत्पादन क्षमता और वित्तपोषण के अभाव में यह आंकड़ा महज 6.5 करोड़ पर है। अब तक दुनिया के 82 प्रतिशत टीकों की खुराक संपन्न देशों को गई है जबकि कम आय वर्ग वाले देशों में महज 0.3 प्रतिशत खुराक पहुंची हैं।

सच है कि पूरे विश्व में टीकाकरण तथा निरंतर जन स्वास्थ्य उपायों से ही वैश्विक महामारी को समाप्त किया जा सकता है और अधिक खतरनाक स्वरूपों को पैर जमाने से रोका जा सकता है। परंतु टीकों, जांचों, दवाओं और ऑक्सीजन समेत अन्य आपूर्तियों तक असमान पहुंच ने विकासशील देशों को वायरस के सामने लाचार कर दिया है। भारत में तो केवल कोरोना वायरस का प्रकोप ही नहीं बल्कि इससे जुड़े फंगस आदि के दूसरे रोग भी अति-गंभीर व जानलेवा हैं।

कोरोना के मामले में देश में तैयारी अभी तक काफी कम व आधी-अधूरी लगती हैं। पहली लहर, दूसरी का भयावह कहर और तीसरी की आशंकाओं के बीच नित नई सूचनाएं असमंजस व डर का वातावरण बना रही हैं। ब्लैक व व्हाइट फंगस के प्रकोप से चिंताएं बढ़ गई हैं। बताया जा रहा है कि ब्लैक फंगस के मामले उन रोगियों में देखे जा रहे हैं, जिन्हें कोरोना के इलाज के दौरान स्टेरॉयड दिया गया। विशेषकर उन मरीजों में जो मधुमेह व कैंसर से ग्रस्त रहे हैं।

बहरहाल, नित नए संकट पैदा करते कोरोना वायरस के मुकाबले के लिए जरूरी है कि बचाव की परंपरागत सावधानियों का पालन किया जाए। अब जब पता चला है कि वायरस हवा के जरिए भी फैलता है तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। टीकाकरण इसका अंतिम समाधान है और वह फिलहाल लक्ष्य हासिल करता नजर नहीं आता तो बचाव ही उपचार है।

केन्द्र और राज्य सरकारें आपसी सहयोग एवं समर्थन से इस संबंध में प्रभावी नीति बनाकर उस पर ईमानदारी से अमल करें। मास्क के उचित प्रयोग, शारीरिक दूरी तथा खुली हवा की व्यवस्था बचाव के साधन ही हैं। भय और निराशा की भावना से उबरना होगा। याद रखना होगा कि जब तक सब सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक कोई भी सुरक्षित नहीं है।