नेपाल में अस्थिरता
पड़ोसी देश नेपाल कोरोना की दूसरी लहर से घिरा है और स्वास्थ्य तंत्र का ढांचा ध्वस्त होने से मानवीय क्षति का सिलसिला जारी है। वहीं राजनीतिक अस्थिरता का दौर भी चल रहा है। नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने संसद भंग करके नवंबर में चुनाव कराने का फैसला किया है। पिछले पांच माह में …
पड़ोसी देश नेपाल कोरोना की दूसरी लहर से घिरा है और स्वास्थ्य तंत्र का ढांचा ध्वस्त होने से मानवीय क्षति का सिलसिला जारी है। वहीं राजनीतिक अस्थिरता का दौर भी चल रहा है। नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने संसद भंग करके नवंबर में चुनाव कराने का फैसला किया है। पिछले पांच माह में दूसरी बार प्रतिनिधि सभा को भंग करना राजनीतिक अस्थिरता की कहानी कहता है।
नेपाल के विपक्षी गठबंधन ने राष्ट्रपति द्वारा प्रतिनिधि सभा को भंग करने के फैसले को ‘असंवैधानिक’ बताते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने नवंबर में चुनाव कराने की घोषणा को रद करने, महामारी के बीच चुनाव से संबंधित कार्यक्रमों को रोकने तथा संविधान के प्रावधान के अनुरूप बजट प्रस्तुत करने के लिहाज से सदन की बैठक बुलाने के लिए आदेश जारी करने की मांगें भी की हैं। दरअसल नेपाल राजशाही से तो मुक्त हो गया था। परंतु उसके लोकतंत्र की सांस राजनीतिक दलों की भयंकर गुटबाजी में फंसी है।
इससे पहले संसद में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली 10 मई को बहुमत हासिल नहीं कर पाए थे। फिर राष्ट्रपति ने विपक्ष को 24 घंटे में बहुमत साबित करके सरकार बनाने को कहा था, लेकिन विपक्ष भी बहुमत का आंकड़ा जुटाने की कोशिश इतने कम समय में नहीं कर पाया। जानकारों का आरोप है कि राष्ट्रपति हर तरह से ओली को फायदा पहुंचाने की कोशिश में लगी रहती हैं। ओली का झुकाव चीन की ओर है।
ताजा संकट की शुरुआत गत वर्ष दिसंबर में हो गई थी जब ओली की सीपीए (यूएमएल) और पुष्प कुमार दहल ‘प्रचंड’ के नेतृत्व वाले सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) में अलगाव सामने आया था। इसके बाद ओली ने संसद भंग करके मध्यावधि चुनाव करने की घोषणा कर दी, जिसके खिलाफ विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट गये। शीर्ष अदालत ने फरवरी में सरकार भंग करने को असंवैधानिक करार देते हुए संसद को बहाल करने के आदेश दिए थे।
बहरहाल, नेपाल में लागू किए नए संविधान के जरिये भी अस्थिरता का रोग ठीक होता नजर नहीं आता। ओली की उच्च राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी मिलकर सरकार चलाने के रास्ते में बाधा बनती रही है। मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे वक्त में हो रहा है जब देश के स्वास्थ्य विशेषज्ञ राजनेताओं से राजनीतिक तिकड़में छोड़कर लोगों की जिंदगियों को बचाने के लिये प्रयास करने को कह रहे हैं। भारत की चिंता है कि नेपाल का लोकतंत्र मजबूत हो और वहां स्थिर सरकार बने। चीन के लगातार हस्तक्षेप से वहां चीन विरोधी भावनाएं भी पनपने लगी हैं। भारत की नजर नेपाल के घटनाक्रम पर है।
