भरोसा जरूरी
प्रदेश पुलिस ने आजमगढ़ के एक व्यक्ति को फिलिस्तीन के समर्थन में घरों पर झंडा लगाने की अपील वाले फेसबुक पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया है। हालांकि आजमगढ़ के सरायमीर मुहल्ले के रहने वाले यासिर अख्तर के परिवार का कहना है कि फेसबुक पोस्ट भारत के लिए नहीं बल्कि गाजा की एक खबर थी। जिसमें …
प्रदेश पुलिस ने आजमगढ़ के एक व्यक्ति को फिलिस्तीन के समर्थन में घरों पर झंडा लगाने की अपील वाले फेसबुक पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया है। हालांकि आजमगढ़ के सरायमीर मुहल्ले के रहने वाले यासिर अख्तर के परिवार का कहना है कि फेसबुक पोस्ट भारत के लिए नहीं बल्कि गाजा की एक खबर थी। जिसमें गलती से गाजा शब्द छूट गया था।
यासिर के खिलाफ धारा 505 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया। अमूमन यह धारा दो वर्गों के बीच शत्रुता, घृणा या द्वेष पैदा करने या बढ़ावा देने वाले शरारतन या जानबूझ कर दिए बयान पर और इसकी उपधारा धर्म स्थल पर किए जाने वाले अपराध के मामलों में लगाई जाती है। लेकिन न तो उसने किसी धर्म के बारे में कुछ कहा या लिखा, न ही अपने देश के खिलाफ कोई बात की।
एकबारगी यह मान भी लिया जाए कि उसने देश के भीतर फिलिस्तीन के समर्थन में झंडा लगाने की अपील की भी हो तो ऐसा करना किसी धर्म या समुदाय को आहत करना कैसे हो गया, जबकि भारत खुद फिलिस्तीन के साथ खड़ा है और अनेक भारतीय भी उसका समर्थन कर रहे हैं। यह प्रसंग प्रदेश में कानून-व्यवस्था के नाम पर अब तक हुई तमाम कार्रवाइयों के साथ ही देखा जाना चाहिए।
हाल ही में ग्रेटर नोएडा के मेवला गोपालगढ़ की प्रधान के पति योगेश तालान के खिलाफ पुलिस ने महामारी एक्ट के तहत एफआइआर दर्ज की। उन पर आरोप है कि महामारी से निपटने के सरकारी प्रयासों के विरुद्ध उन्होंने मीडिया में खबर फैलाई कि गांव में मरीजों का इलाज नहीं हो रहा है और वे झोलाछाप डॉक्टर से नीम के पेड़ के नीचे अपना इलाज करवा रहे हैं।
जबकि तालान का कहना है कि उन्होंने गांव की स्वास्थ्य सुविधाओं में कमियां बताईं थीं और ग्रामीणों की कोरोना जांच की मांग की थी, लेकिन यही उनका अपराध बन गया। इसमें कोई दो राय नहीं कि देश-प्रदेश में कानून का राज होना ही चाहिए, पर यह भी जरूरी है कि सरकार पर लोग भरोसा भी करें।
पुलिस की ऐसी कार्रवाई से आशंका होती है, कि क्या प्रदेश में पुलिस मनमाने तरीके से काम कर रही है। याद रखा जाना चाहिए कि हर चीज की अति बुरी होती है। एक समय ऐसा आएगा, जब लोग पुलिस के डंडे से डरना बंद कर देंगे। यूं भी प्रदेश के अगले विधानसभा चुनाव की हलचल शुरू हो चुकी है। पुलिस के जरिए लोगों को सबक सिखाने की कवायद किसी भी तरह उचित नहीं रही जा सकती है।
