शराब का कहर
जहरीली शराब ने अलीगढ़ में एक बार फिर कहर बरपाया है। शराब से मौत मामले का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने आरोपियों पर रासुका के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अलीगढ़ में पिछले माह भी कुल देवता को शराब चढ़ाकर प्रसाद स्वरूप वितरित की गई थी, जिसे पीने से …
जहरीली शराब ने अलीगढ़ में एक बार फिर कहर बरपाया है। शराब से मौत मामले का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने आरोपियों पर रासुका के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अलीगढ़ में पिछले माह भी कुल देवता को शराब चढ़ाकर प्रसाद स्वरूप वितरित की गई थी, जिसे पीने से छह लोगों की मौत हुई थी।
इस घटना को एक माह ही हुआ है और फिर से गांवों में जानलेवा शराब बिकने लगी। जिसे पीकर चार गांवों के 13 लोगों की मौत हो गई है। पिछले वर्ष नवंबर माह में भी प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत दर्जन भर से अधिक स्थानों में जहरीली शराब से मौतें हुई थीं। उस समय प्रदेश सरकार ने दोषियों की संपत्ति कुर्क करने और उन पर गैंगस्टर लगाने के आदेश दिए थे।
प्रदेश में किसी भी रूप में अवैध और जहरीली शराब का निर्माण और बिक्री बंद हो सके, इसके लिए विशेष टीम बनाने का निर्णय लिया गया था। आखिर क्या कारण है कि कुछ दिखावटी कदमों की बजाय सरकार जहरीली शराब के माफियाओं पर कार्रवाई करने में नाकाम रही। अलीगढ़ की ताजा घटना बताती है कि प्रदेश में अवैध शराब का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। राज्य शराब माफिया की गिरफ्त में है।
जब भी इस तरह की घटनाएं होती हैं तो फौरी और रस्मी तौर पर कुछ अधिकारी कर्मचारी निलंबित कर दिए जाते हैं और यह धंधा चलता रहता है। लगता है कि यह व्यवस्था का हिस्सा बन गया है। यह कोई छिपी बात नहीं है कि अवैध शराब का धंधा स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत से ही चल पाता है। देसी शराब लाइसेंस वाली सरकारी दुकानों पर बिकती है लेकिन कई बार कुछ पैसों के लालच में स्थानीय दुकानदार या शराब माफिया इसमें ज्यादा नशे के लिए मिलावट करते हैं।
कच्ची व देसी शराब का सेवन आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों व निम्नवर्गीय बस्तियों में रहने वाले लोग करते हैं। इन्हीं इलाकों में नकली व कच्ची शराब का कारोबार बड़े पैमाने पर चलता है। पुलिस और प्रशासन उन्हें इसलिए चलने देता है, क्योंकि यह धंधे उगाही के बड़े स्रोत होते हैं।
हादसों के बाद भी जिम्मेदार लोगों की आंखें नहीं खुलती और पिछली घटनाओं से कोई सबक लिया नहीं जाता। शराब की बिक्री राज्य सरकारों के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत होती है। इसलिए चाहे किसी भी पार्टी की सरकार सत्ता में रहे शराब माफिया पर इसका कोई असर नहीं पड़ता और अवैध शराब के धंधे पर लगाम नहीं लग पाती। यदि सरकार ठान ले तो जहरीली शराब बेचने वालों का सफाया करना कोई मुश्किल काम नहीं है।
