संघर्ष विराम का मतलब यह नहीं कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई रुक गई- सेना प्रमुख

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नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने कहा है कि पिछले तीन महीनों से जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच संघर्ष विराम से शांति और सुरक्षा के नजरिये को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा …

नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने कहा है कि पिछले तीन महीनों से जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच संघर्ष विराम से शांति और सुरक्षा के नजरिये को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक लंबी राह में यह पहला कदम है।

जनरल नरवणे ने एक साक्षात्कार में कहा कि हालांकि संघर्ष विराम का मतलब यह नहीं है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई रुक गई है। उन्होंने कहा कि यह विश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि पाकिस्तानी सेना द्वारा एलओसी पर आतंकी ढांचे को खत्म कर दिया गया है।

सेना प्रमुख ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के प्रयासों और आतंकवादी घटनाओं में कमी में निरंतरता भारत को अच्छे पड़ोसी संबंधों को बढ़ावा देने संबंधी पाकिस्तान के इरादे के बारे में आश्वस्त करेगी। जनरल नरवणे ने कहा कि संघर्ष विराम समझौते के पालन से क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के समग्र दृष्टिकोण में ”निश्चित रूप से” योगदान मिला है और क्षेत्र में शांति के माहौल की संभावनाओं को बल मिला है। भारत और पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर और अन्य क्षेत्रों में संघर्ष विराम संबंधी सभी समझौतों का सख्ती से पालन करने पर 25 फरवरी को सहमति जताई थी।

सेना प्रमुख ने कहा, ”एलओसी पर संघर्ष विराम का मतलब यह नहीं है कि आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई रुक गई है। हमारे पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि पाकिस्तानी सेना ने एलओसी पर आतंकी ढांचे को खत्म कर दिया है।” अफगानिस्तान से 11 सितम्बर तक अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने संबंधी अमेरिकी प्रशासन के फैसले का जिक्र करते हुए सेना प्रमुख ने कहा, ”चाहे उनकी अक्षमता हो या अनिच्छा, दोनों समान रूप से खतरनाक और चिंताजनक हैं।”

संघर्ष विराम का जिक्र करते हुए जनरल नरवणे ने कहा कि समझौता लागू होने के बाद दोनों सेनाओं द्वारा सीमा पार से गोलीबारी की एक भी घटना नहीं हुई, हालांकि जम्मू सेक्टर में पाकिस्तानी रेंजरों से जुड़ी एक घटना हुई थी। उन्होंने कहा, ”इस साल हमने जम्मू और कश्मीर में हिंसा के स्तर में भारी कमी देखी है। सुरक्षा बल और अन्य सरकारी एजेंसियां ​​आतंकवादी समूहों पर दबाव बनाए रखने पर काम कर रही है।”

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