कई सवाल बाकी
कोरोना की दूसरी लहर के कारण सीबीएसई की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा रद किए जाने के फैसले को छात्र हितैषी निर्णय कहा जा रहा है। फैसला मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद लिया गया। लंबे समय से छात्र और अभिभावक परीक्षा रद करने की मांग कर …
कोरोना की दूसरी लहर के कारण सीबीएसई की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा रद किए जाने के फैसले को छात्र हितैषी निर्णय कहा जा रहा है। फैसला मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद लिया गया। लंबे समय से छात्र और अभिभावक परीक्षा रद करने की मांग कर रहे थे। बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में परीक्षाओं के आयोजन को लेकर जो चिंता है उसे दूर किया जाना चाहिए। ऐसी तनावपूर्ण स्थिति में छात्रों को परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
पहले भी सीबीएसई ने कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए 14 अप्रैल को दसवीं की परीक्षा रद कर दी थी और 12वीं की परीक्षा कराने का निर्णय लिया था। तभी से 12 वीं की परीक्षा भी रद करने की मांग विभिन्न संगठनों, अभिभावकों व छात्रों की ओर से की जा रही थी। मांग के पीछे तर्क दिया जा रहा था कि देश में कोरोना के मौजूदा हालात में स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए किसी भी प्रकार की परीक्षा कराया जाना उचित नहीं है।
सरकार ने परीक्षाएं रद करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे उच्चतम न्यायालय को बताया था कि वह 3 जून तक इस मामले में अंतिम फैसला लेगी। इससे पूर्व ही परीक्षा रद होने के बाद छात्रों ने राहत की सांस ली है। हालांकि छात्रों का तनाव अभी कम नहीं हुआ है। सवाल उठ रहा है कि आखिर उत्तीर्ण करने के लिए छात्रों का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाएगा। परिणाम तैयार करने के लिए सीबीएसई द्वारा किस फॉर्मूले को अपनाया जाएगा। सीबीएसई का मूल्यांकन फार्मूला सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि उन्हें फायदा होगा या नहीं।
क्या आंतरिक, या किसी औसत मार्किंग के आधार पर कोई फार्मूला तय किया जाएगा? उस पर छात्रों की कितनी सहमति होती है। सीबीएसई व आईएससीई की परीक्षा रद होने के बाद विपक्षी दलों ने कहा है कि अब इसी आधार पर अन्य बोर्ड व राज्य बोर्ड की परीक्षाएं भी रद की जानी चाहिए। वैक्सीनेशन की प्रक्रिया पूरी हुए बिना परीक्षा कराना परीक्षार्थियों की जान को जोखिम में डालने वाला होगा।
उधर गुजरात , हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड राज्य बोर्ड की 12 वीं की परिक्षाएं भी रद कर दी गई है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने यूपी बोर्ड की परीक्षा के बारे में जल्द फैसला लेने का भरोसा दिया है। परीक्षाएं रद होने के बाद अनिश्चितता तो खत्म हुई है, पर कई सवाल बाकी हैं। सीबीएसई के सभी क्षेत्रीय बोर्डों को समन्वय बनाकर मूल्यांकन प्रक्रिया तय करनी होगी, जिसमें छात्रों की राय को तो भी अहमियत दी जानी चाहिए।
