बरेली: विदेशी दवा कंपनियों ने मचाई लूट, पोस्ट कोविड दवाओं के दाम कई गुना अधिक

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बरेली,अमृत विचार। कोरोना काल में विदेशी दवा कंपनियां लोगों की जेब ढीली करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। आलम यह है कि देसी कंपनियों के मुकाबले कई गुना अधिक विदेशी कंपनियों की दवाएं महंगी हैं। इसमें अधिकतर दवाएं कोरोना से जुड़ी हैं। जिनको डाक्टर कोविड मरीजों को देते हैं। पोस्ट कोरोना मरीजों …

बरेली,अमृत विचार। कोरोना काल में विदेशी दवा कंपनियां लोगों की जेब ढीली करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। आलम यह है कि देसी कंपनियों के मुकाबले कई गुना अधिक विदेशी कंपनियों की दवाएं महंगी हैं। इसमें अधिकतर दवाएं कोरोना से जुड़ी हैं। जिनको डाक्टर कोविड मरीजों को देते हैं।

पोस्ट कोरोना मरीजों को दी जाने वाली बारिसिटिनिब विदेशी कंपनी की 7 गोलियां 21144 रुपए की हैं। यानी केवल एक गोली तकरीबन 3020 रुपए की है। हैरानी की बात है कि यही दवा अगर देसी कंपनी की खरीदेंगे तो जमीन आसमान का फर्क आएगा। देसी कंपनी की बारिसिटिनिब महज 30 रुपए की एक गोली बाजार में मौजूद है। इसके अलावा फाइजर कंपनी की एपिक्साबन-5 एमजी की एक गोली तकरीबन 78 रुपए में मिलती है। लेकिन इसी फार्मूला में देसी कंपनी की दवा खरीदने पर एक गोली महज 28 रुपए में मौजूद है।

विशेषज्ञों की माने तो यह दवाएं पोस्ट कोविड मरीजों को दी जाती हैं। कोरोना जिस वक्त चरम पर था तो यह दवाएं बाजार से गायब हो गईं। इस काल में अरबों रुपए की दवाएं विदेशी कंपनियों ने बेच डाली। लेकिन अब भारतीय कंपनियां भी यह दवाएं बना रही हैं तो इन दवाओं कमी खत्म हो गई। उधर बरेली महानगर केमिस्ट एसोसिएशन ने इन विदेशी कंपनियों की मनमानी पर गुस्सा जाहिर किया है। उनका कहना है कि इस मामले को लेकर रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से बात करेंगे ताकि दवा कंपनियों की मुनाफाखोरी पर लगाम लग सके।

अमेरिकी कंपनी ने किया था भारतीय कंपनियों से करार
कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के इलाज में रेमडेसिविर के साथ बारिसिटिनिब टैबलेट का उपयोग किया जाता है। हाल ही में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने इस दवा को सीमित आपात इस्तेमाल की मंजूर दी थी। इससे पहले एक अमेरिकी दवा कंपनी ने बारिसिटिनिब को लेकर तीन भारतीय कंपनियों के साथ करार भी किया था। लेकिन बाजार में मौजूद अमेरिकी कंपनी की यह दवा काफी महंगी है।

“सरकार को विदेशी कंपनियों की मनमानी पर रोक लगानी चाहिए। पूरे मामले की शिकायत रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से जल्द करने वाले हैं। सरकार भारतीय दवा कंपनियों को बढ़ावा दे।” -दुर्गेश खटवानी, अध्यक्ष, महानगर कोमिस्ट एसोसिएशन

“विदेशी कंपनियों ने कोरोना काल के दौरान अरबों रुपए की दवाएं बेच डाली। इनकी कीमतें देसी दवा कंपनियों से कहीं अधिक हैं। भारतीय कंपनियों में पूरी क्षमता है लिहाजा सरकार को उनका साथ देना चाहिए।” -चंद्र भूषण गुप्ता, जिला महामंत्री, केमिस्ट एसोसिएशन

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