लक्ष्य से दूर
देश में कोरोना संकट की दूसरी लहर उतार पर है। सक्रिय मामलों की दर घटकर 5.13 प्रतिशत व रिकवरी दर बढ़कर अब 93.67 फीसदी हो गई है। कोरोना से मृत्यु दर अभी 1.20 फीसदी है। अब तक 23 करोड़ 13 लाख लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। ऐसे में वर्ष के अंत तक देश …
देश में कोरोना संकट की दूसरी लहर उतार पर है। सक्रिय मामलों की दर घटकर 5.13 प्रतिशत व रिकवरी दर बढ़कर अब 93.67 फीसदी हो गई है। कोरोना से मृत्यु दर अभी 1.20 फीसदी है। अब तक 23 करोड़ 13 लाख लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। ऐसे में वर्ष के अंत तक देश की वयस्क आबादी के टीकाकरण के लक्ष्य को पाना संदिग्ध लगता है। विशाल आबादी को देखते हुए टीकाकरण को और तेज करना होगा। इसके लिए जिलेवार रणनीति बनानी होगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ देश में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर आशंका जता रहे हैं। समय रहते टीकाकरण ही इस संकट से बचाव का कारगर उपाय है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि देश में सत्तर प्रतिशत वयस्क आबादी को टीका लगाए बिना कोरोना संकट से मुक्त होकर जीवन सामान्य बनाना असंभव है। धीमा टीकाकरण व टीका आपूर्ति की विसंगति चिंता बढ़ाने वाली है।
उच्चतम न्यायालय को टीकाकरण अभियान पर टिप्पणी करनी पड़ी कि देश में टीकाकरण की प्रक्रिया मनमानी व तर्कहीन है। इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। निस्संदेह देश में टीका उत्पादन के जैसे समृद्ध संसाधन उपलब्ध थे और जो हमारी क्षमता थी, उसका बेहतर उपयोग हम टीकाकरण अभियान में नहीं कर पाए हैं। सवाल है कि पहली कोरोना लहर के बाद के समय का उपयोग टीका उत्पादन में तेजी लाने में क्यों नहीं हुआ। क्या मान लिया गया था कि कोरोना वायरस सदा के लिए चला गया है? अब जैसी हड़बड़ी केंद्र सरकार दिखा रही है, क्या ऐसे प्रयास पहले नहीं किए जा सकते थे? जबकि विशेषज्ञ पहले ही टीकाकरण की धीमी गति, टीकों के मूल्य निर्धारण और उसकी कमी पर चिंता जता चुके हैं।
कोरोना से बचाव के लिए आगे बढ़ने का एक ही रास्ता है, मास वैक्सी़नेशन। यदि हम बड़ी आबादी के टीकाकरण की ओर नहीं बढ़ेंगे तो कोरोना की आगामी लहर में हम सुरक्षित नहीं रह सकेंगे। केंद्र सरकार को अधिकतम वैक्सीन खरीदनी चाहिए और लोगों तक पहुंचानी चाहिए। यहां तक कि सरकार को घर-घर टीकाकरण की सुविधा भी शुरू करानी चाहिए।
सरकारों को जल्द से जल्द टीकाकरण कराने की रणनीति पर काम करना होगा। हालंकि केन्द्र की ओर से शीघ्र ही कई नए वैक्सीन विकल्प उपलब्ध कराने की बात की जा रही हैं। सरकार की दलील है कि वह वैश्विक वैक्सीन निर्माताओं के साथ बातचीत करके टीकाकरण अभियान को तेज करने के प्रयासों में लगी हुई है। साथ ही संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए देश में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग को और बेहतर करने की जरूरत है। लोगों को भी समझना होगा कि वायरस कमजोर पड़ा है, समाप्त नहीं हुआ है। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है।
