बरेली: नालों की सफाई में भी खेल, ठेका प्राइवेट को…ड्यूटी लगा दी नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की
बरेली,अमृत विचार। नालों की सफाई के नाम पर खेल चल रहा है। पहले उन नालों की सफाई के काम में विभागीय सफाई कर्मचारियों को लगाए जाने का मामला सामने आया था, जहां ठेकेदार भी काम करा रहे हैं। अब यह गड़बड़ी सामने आई है कि नालों की सफाई के दौरान निकलने वाले मलबे की बिक्री …
बरेली,अमृत विचार। नालों की सफाई के नाम पर खेल चल रहा है। पहले उन नालों की सफाई के काम में विभागीय सफाई कर्मचारियों को लगाए जाने का मामला सामने आया था, जहां ठेकेदार भी काम करा रहे हैं। अब यह गड़बड़ी सामने आई है कि नालों की सफाई के दौरान निकलने वाले मलबे की बिक्री हो रही है।
इससे भी ज्यादा खतरे वाली बात यह है कि इस मलबे को कई सड़कों के किनारे गड्ढे भरने के काम में लाया जा रहा है। इससे यहां हादसे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। हालांकि ये मामला उजागर होने के बाद अब अंदरखाने इस गड़बड़ी की जांच शुरू हो गई है।
शहर में छोटे-बड़े करीब 225 नालों की सफाई होनी है। इसमें 55 बड़े नाले ऐसे हैं, जिनकी सफाई का ठेका दिया गया है। ठेकेदार को सफाई के लिए अपने मजदूरों को लगाना चाहिए लेकिन ठेकेदार व अधिकारियों की मिलीभगत से नालों की सफाई के लिए नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को भी लगा दिया गया है। सफाई कर्मचारी एवं मजदूर संघ के कई पदाधिकारियों ने इसे लेकर विरोध किया था।
उनका कहना था कि जब बड़े नालों की सफाई के लिए ठेका दे दिया गया है तो निगम के कर्मचारियों को क्यों लगाया जा रहा है? जो सफाई कर्मचारी मना कर रहे हैं, उन पर अधिकारियों की ओर से दबाव बनाया जा रहा है। नालों की सफाई के नाम पर एक और खेल यह सामने आया है कि नालों से निकलने वाली शिल्ट की बिक्री की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि बड़े नालों से बड़ी मात्रा में शिल्ट निकाली जाती है। उसे नालों के पास की कई दिनों तक सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। बाद में उसकी 300 से 400 रुपये प्रति ट्रॉली के हिसाब से बिक्री कर दी जाती है। इस शिल्ट का इस्तेमाल बड़े खड्ढों के भरने के साथ कई सड़कों के किनारे भी डाला जा रहा है। इससे यहां हादसे की आशंका भी बनी हुई है। यह खेल खुल जाने के बाद अधिकारी अब इस मामलों की जांच कराने की बात कह रहे हैं।
तीन साल में पांच से छह करोड़ खर्च लेकिन साफ नहीं होते नाले
नगर निगम प्रशासन प्रशासन से पहले नाले-नालों की सफाई के नाम पर हर साल पौने दो से लेकर दो करोड़ रुपये तक के ठेके देता है। इससे शहर के तमाम नालों की सफाई का काम शामिल हैं। इस साल भी करीब दो करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है। पिछले दो साल के दौरान करीब पौने दो करोड़ रुपये से नालों की सफाई कराई गई है। इतनी रकम खर्च होने के बावजूद नालों की सफाई ठीक तरीके से नहीं हो पा रही है।
अवैध कब्जा से भी नहीं हो पाती सफाई
शहर के ज्यादातर नालों की सफाई इसलिए नहीं हो पाती, क्योंकि उन पर अवैध कब्जे हो गए है। ऐसे में दिक्कत यह है कि सफाई कर्मचारी अतिक्रमण की वजह से नालों में घुसकर किस तरह से सफाई करें। अभी कुछ दिन पहले श्यामगंज में नाले की सफाई करने के लिए कब्जा किए दुकानदारों से नगर निगम को टीम भिड़ गई है। काफी जद्दोजहद के बाद सफाई का काम हो सका।
अभी 30 फीसदी सफाई का काम बाकी
नालों की सफाई का काम शुरू हुए करीब सवा महीने हो गए हैं लेकिन अभी भी करीब 30 फीसदी काम पूरा हो सका है। कुछ दिन पहले नगर आयुक्त अभिषेक प्रकाश ने अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद नालों की सफाई के अभियान को युद्धस्तर पर चलाने और नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। समय से सफाई न होने से कई इलाकों में जलभराव की दिक्कत पैदा हो जाती है।
“नालों की सफाई का ठेका देने के बावजूद निगम के सफाई कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगा दी जाती है। इसका विरोध किया गया है। जल्द ही इसकी शिकायत नगर आयुक्त व मेयर से भी की जाएगी।” -राजेश कुमार, महानगर अध्यक्ष, सफाई कर्मचारी मजदूर संघ
