हल्द्वानी: मैडम का घर यानि इच्छा शक्ति, दूरदर्शिता, विकास की नजर और शानदार व्यक्तित्व का ‘संकलन’
मनोज लोहनी, हल्द्वानी। नैनीताल रोड की एक खास पहचान या लैंड मार्क सौरभ होटल और उसके साथ ‘मैडम’ का घर। मैडम (नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश)वह शब्द और एक व्यक्तित्व के लिए वह उपमा जिसने लोगों की जुबान पर खुद जगह बनाई। उत्तराखंड की राजनीति की एक पहचान भी मैडम के रूप में ही सामने …
मनोज लोहनी, हल्द्वानी। नैनीताल रोड की एक खास पहचान या लैंड मार्क सौरभ होटल और उसके साथ ‘मैडम’ का घर। मैडम (नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश)वह शब्द और एक व्यक्तित्व के लिए वह उपमा जिसने लोगों की जुबान पर खुद जगह बनाई। उत्तराखंड की राजनीति की एक पहचान भी मैडम के रूप में ही सामने आई, जो कांग्रेस की राजनीति के लिए किसी लैंड मार्क की तरह ही खास थीं। उत्तराखंड के राजनीति की वह शख्सियत जिसके अंदर थी दूरदर्शिता, विकास की सोच, मैनेजमेंट और वह सब कुछ जो कुशल राजनेता के व्यक्तित्व का हिस्सा होता है। ‘संकलन’ में रहने वाली यह शख्सियत खुद संघर्षों, जुनून और इच्छाशक्ति का ही संकलन बन गईं। ऐसा कि विकास और मैडम हल्द्वानी के लिए आपस में एक-दूसरे का पर्याय बन गए।
यह ‘संकलन’ आज बिलकुल अधूरा था। वहां लोग थे, सब कुछ वही था मगर माहौल में ऐसा शून्य जिसे साफ महसूस किया जा सकता था। इस संकलन में कल तक हल्द्वानी के एक आदमी की मैडम के ठहाके थे तो, कभी बातचीत की वह गंभीर मुद्रा जिससे निकलने वाले किसी भी सवाल के उत्तर से आम आदमी के चेहरे पर सुकून होता था। संकलन में खास कोई नहीं था, भावनाओं का यह संकलन आम आदमी के लिए ज्यादा था। कहां जा रहे हो, मैडम के घर..।
बात बिलुकल साफ, कि वहां जाने के लिए कदम ठिठकते नहीं थे। उत्तराखंड कांग्रेस की राजनीतिक धुरी का यह संकलन अब केवल उनकी वहां लगी कुछ तस्वीरों, गेट पर बने चित्र के रूप में था। यही चित्र अब डॉ. इंदिरा हृदयेश नाम की उस महिला की मुस्कान दिखा रहे थे, जिनकी मुस्कान आम आदमी को सुकून देती थी। यहां तमाम लोग उस चित्र को देख तो रहे थे, मगर यह उम्मीद नहीं कर सकते कि संकलन से अब वह आवाज आएगी जो अपनी पूरी जिंदगी में संघर्षों की मिसाल बनकर आगे बढ़ीं और फिर राजनीति के पटल पर छा गईं। मगर संकलन उस आयरन लेडी के विकास का गवाह तो है ही, जाना तो उन्हें था।
मगर इस तरह चुपके से जाना लोगों को स्तब्ध कर गया…और यही अफसोस कि उन्हें अभी और राज्य के लिए कुछ करना था। इंदिरा हृदयेश नाम की यह महिला किसी भी मायने में इंदिरा से कम नहीं..उनकी आवाज तो अब नहीं आएगी वह जाने से पहले वह विकास का जो बैंच मार्क बनाकर गईं हैं वह तो यहां है ही। अलविदा मैडम…।
