बरेली: छोटे खरीदारों की बढ़ेंगी मुश्किलें, बड़े उठाएंगे लाभ

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। संपत्ति खरीदने से पहले जिलाधिकारी से अनुमति लेने के साथ उसका मूल्यांकन कराने के लिए सरकार जिस ‘संपत्ति मूल्यांकन नियामवली-1997’ में संशोधन प्रस्ताव लेकर आयी है। उससे भले ही स्टांप शुल्क के विवाद कम होने का दावा किया जा रहा हो लेकिन इसकी दुश्वारियों पर किसी स्तर पर गौर नहीं किया गया। …

बरेली, अमृत विचार। संपत्ति खरीदने से पहले जिलाधिकारी से अनुमति लेने के साथ उसका मूल्यांकन कराने के लिए सरकार जिस ‘संपत्ति मूल्यांकन नियामवली-1997’ में संशोधन प्रस्ताव लेकर आयी है। उससे भले ही स्टांप शुल्क के विवाद कम होने का दावा किया जा रहा हो लेकिन इसकी दुश्वारियों पर किसी स्तर पर गौर नहीं किया गया।

संशोधन प्रस्ताव के लागू होने के बाद सबसे ज्यादा दिक्कतें उन खरीदारों को झेलनी पड़ेंगी, जो पेट काटकर किसी तरह जमापूंजी एकत्र कर प्लॉट, मकान या अन्य भू-संपत्ति खरीदते हैं। क्योंकि, संपत्ति खरीदने के लिए आवेदन करने के बाद जब तक भू-संपत्ति का मूल्यांकन कराकर रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम की अनुमति मिलेगी, तब तक विक्रेता कहीं और सौदा कर चुकेगा लेकिन सरकार के इस नियम से बड़े खरीदारों पर असर नहीं पड़ेगा। उनको आवेदन करने से लाभ ही पहुंचेगा।

भू-संपत्ति के बड़े सौदे में राजनीतिक दबाव से लेकर हर चीज जुड़ी होती है। ऐसे में सर्किल रेट के आधार पर भू-संपत्ति का मूल्यांकन भी समय पर होगा और खरीदारों के मनमुताबिक भी मूल्यांकन हो सकेगा लेकिन नए नियम के लागू होने के बाद उप निबंधक कार्यालयों की दिक्कतों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की भी मुश्किलें बढ़ेंगी। यह सोचकर अधिकारी अभी से परेशान हो रहे हैं। वर्तमान में बरेली जनपद में रजिस्ट्री की स्थिति पर गौर करें तो प्रतिदिन 250 से अधिक रजिस्ट्री जिला मुख्यालय के साथ तहसीलों में स्थित उप निबंधक कार्यालयों में होती हैं।

कोरोना में यह संख्या है, कारोबार की चाल ठीक होने पर इससे ज्यादा रजिस्ट्री होंगी। ऐसे में एक दिन में इतनी बड़ी संख्या में आवेदनों पर भू-संपत्ति का मूल्यांकन कराकर उसकी रिपोर्ट के आधार पर रजिस्ट्री कराने के लिए अनुमति देना भी आसान नहीं है। उप निबंधक कार्यालय के अधिकारी बताते हैं कि कम से कम एक माह तक रजिस्ट्री फसेंगी। इसका असर खरीदारों पर पड़ने के साथ सरकार के राजस्व भी पड़ेगा।

तो इसके लिए अलग से नियुक्त करना पड़ेगा स्टाफ
संपत्ति मूल्यांकन नियामवली-1997 में संशोधन प्रस्ताव के बाद नए नियम को लागू करने के लिए आदेश जारी होने का इंतजार किया जा रहा है। बताते हैं कि धारा 31 के तहत जिलाधिकारी भू-संपत्ति का मूल्यांकन कराकर रजिस्ट्री कराने की अनुमति देंगे लेकिन इसके लिए जिलाधिकारी को अलग से अधिकारी और स्टाफ को नियुक्त करना पड़ेगा। सैकड़ों की संख्या में आवेदनों पर भू-संपत्ति का मूल्यांकन कराने के लिए लेखपालों की ड्यूटी लगाना अनिवार्य हो सकता है। वर्तमान में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार पांडेय और उनके कार्यालय के दो बाबू उप निबंधक कार्यालय से जुड़े मामलों की जांच पड़ताल करते हैं।

सरकारी प्रोजेक्टों के लिए भूमि अधिग्रहण की राह होगी आसान
नये नियम के लागू होने के बाद सरकारी प्रोजेक्टों के लिए जो जमीनें अधिग्रहण की जाती हैं। उसमें अभी किसानों को मुंह मांगे दाम देने पड़ते हैं। किसान चार गुना तक दाम लेते हैं लेकिन नए नियम के लागू के बाद सरकार अपने हिसाब से किसानों को दाम देगी। जिलाधिकारी पहले उस क्षेत्र की भूमि का सर्किल रेट के आधार पर मूल्यांकन कराएंगे। उस मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर किसानों से भूमि अधिग्रहण करने को लेकर बात की जाएगी। इससे किसानों को मजबूरन सर्किल रेट के अनुसार ही अपनी मुआवजा लेना पड़ेगा।

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