रक्षा कवच छिना

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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केंद्र सरकार और ट्विटर के बीच विवाद थम नहीं रहा है। नियमों का पालन नहीं करने पर देश में ट्विटर से आईटी एक्ट के तहत मिला इंटरमीडरी प्लेटफॉर्म का रक्षा कवच छीन लिया गया है। अब अपने प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित पोस्ट के लिए ट्विटर सीधे संपादकीय रूप से जिम्मेदार होगा। ट्विटर पर यह सख्ती ऐसे …

केंद्र सरकार और ट्विटर के बीच विवाद थम नहीं रहा है। नियमों का पालन नहीं करने पर देश में ट्विटर से आईटी एक्ट के तहत मिला इंटरमीडरी प्लेटफॉर्म का रक्षा कवच छीन लिया गया है। अब अपने प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित पोस्ट के लिए ट्विटर सीधे संपादकीय रूप से जिम्मेदार होगा। ट्विटर पर यह सख्ती ऐसे समय में हुई है, जब एक वायरल वीडियो के संबंध में उस पर गाजियाबाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आश्चर्यजनक है कि स्वयं को स्वतंत्र अभिव्यक्ति के ध्वजवाहक के रूप में पेश करने वाला ट्विटर खुद नियमों की अवहेलना करता है। पिछले कुछ महीनों में ट्विटर और भारत सरकार के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी हुई है।

भारत में ट्विटर के प्रयोगकर्ताओं की संख्या 1.75 करोड़ है। मेनस्ट्रीम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में ट्विटर ऐसा अकेला प्लेटफॉर्म है, जिसने नए नियमों का पालन नहीं किया है। नियमों की अवहेलना पर की गई कार्रवाई से आशंका जताई जा रही है कि देश में ट्विटर पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। हालांकि भारत अकेला देश नहीं जिसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मतभेद हुए हैं। पूर्व में कई देशों में फेसबुक, ट्विटर और अन्य ऐप को बैन किया जा चुका है। जिन देशों में ट्विटर पर प्रतिबंध जा चुका है, उनमें चीन, मिस्र, ईरान, नोर्थ कोरिया, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान और यूके जैसे देश शामिल हैं।

इस बात को समझा जा सकता है कि नए आईटी नियम कार्यपालिका को अभूतपूर्व शक्तियां देते हैं, जहां अस्पष्ट आधार पर बिना प्रकाशक को उनकी बात कहने का मौका दिए, डिजिटल मीडिया न्यूज़ प्लेटफॉर्म का कंटेट हटाया जा सकता है। इन शक्तियों के साथ नौकरशाह सबसे बड़े संपादक और सेंसर हो जाएंगे। कानूनविदों का मानना है कि आईटी अधिनियम के तहत ऑनलाइन समाचार सामग्री को रखना इस अधिनियम के आगे की बात है और यह संविधान के तहत मिली बोलने की आजादी का स्पष्ट उल्लंघन है। 26 मई से प्रभावी हुए नियमों पर सोशल साइट्स ने कहा था कि ये लोगों के निजता के अधिकार को कमजोर करेंगे।

दूसरी ओर कहा जा रहा था कि योजनाबद्ध तरीके से सोशल मीडिया अभियान चलाकर देश में अशांति फैलाने की कोशिश हो रही है। इस पर नेटवर्किंग साइटों के दुरुपयोग का संज्ञान लेना व नियमों के तहत कार्रवाई करना जरूरी है। पर इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि कार्रवाई से देश की लोकतांत्रिक छवि को भी नुकसान न पहुंचे।