मूल्यांकन योजना
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) व काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) ने उच्चतम न्यायालय में 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए अंकों का मूल्यांकन मापदंड पेश किया है। उच्चतम न्यायालय ने सीबीएसई के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। कोरोना महामारी के चलते बोर्ड ने 1 जून को 12 वीं कक्षा …
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) व काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) ने उच्चतम न्यायालय में 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए अंकों का मूल्यांकन मापदंड पेश किया है। उच्चतम न्यायालय ने सीबीएसई के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।
कोरोना महामारी के चलते बोर्ड ने 1 जून को 12 वीं कक्षा की परीक्षाओं को रद कर दिया था। कहा गया था कि महामारी की भयावह लहर के चलते परीक्षा कराना संभव नहीं है। इसके बाद से ही छात्रों को उत्तीर्ण करने का क्या फार्मूला रहेगा, इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। बोर्ड ने मूल्यांकन मानदंड तैयार करने के लिए 12 सदस्यों की समिति बनाई थी। समिति ने मूल्यांकन मापदंड के लिए सिफारिश की है कि 10 व 11 कक्षा के परिणामों में 30 प्रतिशत और कक्षा 12 की प्री बोर्ड परीक्षाओं को 40 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा।
शीर्ष न्यायालय के न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने गुरुवार को बताया कि मूल्यांकन के फार्मूले से असंतुष्ट छात्रों को 12वीं कक्षा की परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा, जो महामारी के हालात में सुधार होने पर कराई जाएगी। न्यायालय ने अटॉर्नी जनरल से सीबीएसई की योजना में विवाद समाधान की व्यवस्था की रूपरेखा पेश करने को कहा था ताकि छात्रों की शिकायतों पर सुनवाई की जा सके। अदालत ने कहा कि बारहवीं का परिणाम घोषित होने के बाद विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त अंकों के बारे में उनकी शिकायत दूर करने के लिए एक तंत्र होना चाहिए। छात्रों के हित में तर्कसंगत व न्यायपूर्ण फार्मूला शीघ्र ही लाना जरुरी था। अब बोर्ड 31 जुलाई तक परिणाम घोषित कर देगा।
निश्चित रुप से बोर्ड की ओर से गठित समिति गहन विचार विमर्श के बाद ही इस निर्णय पर पहुंची है। कहा जा रहा है कि यदि परीक्षाओं के मूल्यांकन मापदंड के लिए यह नीति जरूरी संशोधनों के साथ भविष्य के लिए भी लागू कर दी जाए तो विद्यार्थियों का बेस अच्छा हो जाएगा। वह शुरु से उतनी मेहनत करेगा, जितना बोर्ड की परीक्षा के लिए तैयारी करता है। अभी भी छात्रों के एक वर्ग की ओर से कहा जा रहा है कि कक्षा 11 में बच्चे उतनी मेहनत नहीं करते हैं। इसलिए 11 वीं की परीक्षा के अंकों को कम प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सीबीएसई के साथ आईसीएसई ने भी 12 वीं के छात्रों के लिए फार्मूले की घोषणा कर दी है। आईसीएसई ने पिछले वर्ष वाला ही फार्मूला रखा है। अब देखना होगा कि देश के बाकी राज्यों में विभिन्न बोर्ड छात्रों के लिए क्या फार्मूला लेकर आते हैं।
