बरेली: केमिकल टैंक में बाघिन, पकड़ने को जाल व पिंजड़ा लगाया

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। डेढ़ साल तक विशेषज्ञों को छकाने और लाखों रुपये खर्च कराने के बाद गुरुवार को वन विभाग के अधिकारी बाघिन के करीब पहुंच गए। 20 साल से बंद पड़ी रबर फैक्ट्री के केमिकल टैंक में बाघिन छिपी मिली। उसे पकड़ने के लिए उसके अंदर-बाहर जाने वाले सभी रास्तों पर जाल बिछा दिया …

बरेली, अमृत विचार। डेढ़ साल तक विशेषज्ञों को छकाने और लाखों रुपये खर्च कराने के बाद गुरुवार को वन विभाग के अधिकारी बाघिन के करीब पहुंच गए। 20 साल से बंद पड़ी रबर फैक्ट्री के केमिकल टैंक में बाघिन छिपी मिली। उसे पकड़ने के लिए उसके अंदर-बाहर जाने वाले सभी रास्तों पर जाल बिछा दिया गया है। अब बाघिन टैंक से बाहर आयी तो जाल में उसका फंसना तय है। इसके बाद उसे ट्रैक्युलाइज कर लिया जाएगा।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व की टीम पहले से मुस्तैद हो गयी है। इसके साथ टैंक के रास्ते पर पिंजड़ा भी लगाया गया है। बाघिन को पकड़ने के लिए विभाग ने फुर्ती दिखाते हुए बाघिन की चारों ओर से घेराबंदी कर ली है। बाघिन के टैंक में घुसने का आभास वन विभाग को तड़के करीब 5 बजे हुआ। सुबह होते ही बाघिन के पकड़ में आने की खबर आसपास के गांव में फैली तो लोगों का जमावड़ा लगने लगा। भीड़ होने पर रेस्क्यू चलाने में थोड़ी दिक्कत आई।

वन विभाग की टीम ने फैक्ट्री में दाखिल हुए लोगों को बाहर किया। बाघिन को हलचल का अहसास न हो, इसके लिए अधिकारी खुद भी दूर बैठकर इंतजार करने लगे। हालांकि बारिश की वजह से थोड़ा खलल जरूर पड़ा। कहा जा रहा है कि अगर रात में बारिश हुई तो बाघिन पिंजरे में जरूर आएगी। इस पूरे ऑपरेशन पर नजर बनाए रखने के लिए मुख्य वन संरक्षक ललित कुमार वर्मा और वन संरक्षक जावेद अख्तर और प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) भरत लाल मौके पर पहुंचे और कई घंटे तक फैक्ट्री में रहे।

मौके पर अपनी टीम के साथ मौजूद डीएफओ भरत लाल

पिंजरे में आई तो करेंगे ट्रैंक्युलाइज
अधिकारियों ने बताया कि ट्रैंक्युलाइज करने के के बाद 45 से 75 मिनट तक बाघिन बेहोश रहती है। इस बीच उसका मेडिकल चेकअप होता है। होश में आने के बाद बाघिन को वाइल्ड लाइफ निर्देशों के मुताबिक सुरक्षित स्थान पर ले जाते हैं और फिर जंगल में छोड़ दिया जाता है।

टैंक को ठिकाना बना चुकी थी बाघिन
बाघिन को पकड़ने की तैयारी में पीलीभीत टाइगर रिजर्व, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून और वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की टीमें लगी हुई थीं। 39 कैमरों से बाघिन पर नजर रखी जा रही है। बाघिन बार-बार अपनी लोकेशन बदल रही थी। इस बीच वन विभाग को पता चला कि बाघिन कोयला प्लांट से एक टैंक की तरफ अक्सर जाती है। कई दिन निगरानी के बाद विभाग इस बात से आश्वस्त हो गया कि बाघिन ने टैंक के अंदर ही अपना ठिकाना बना लिया है।

ट्रैंक्युलाइज किया जाएगा
डीएफओ भरत लाल ने बताया कि अगर बाघिन पिंजरे में आती है तो उसको ट्रैंक्युलाइज किया जाएगा। फिलहाल वह टैंक के अंदर ही है। टीमें उस पर नजर बनाए हुए हैं। उसके पिंजरे में आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

बाघिन टैंक के अंदर
मुख्य वन संरक्षक, ललित कुमार वर्मा ने बताया कि सुबह से ही बाघिन टैंक के अंदर है। रेस्क्यू टीमें अपना काम कर रही हैं। जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंचा जाएगा।

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