शाहजहांपुर: करोड़ों की जमीन की चौथी बार भी नहीं हुई पैमाइश, राजस्व टीम मौके पर पहुंची लेकिन…
अमृत विचार, शाहजहांपुर। गाटा संख्या 1677 व 1678 जमीन घोटाला सुलझने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोड़ों रुपये की इस जमीन को किसी तरह भू-माफिया के चंगुल से मुक्त तो करा दिया गया, लेकिन नगर निगम अपनी ही इस जमीन पर मालिकाना हक नहीं ले पा रहा है। पैमाइश कराके तूदाबंदी होनी है और …
अमृत विचार, शाहजहांपुर। गाटा संख्या 1677 व 1678 जमीन घोटाला सुलझने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोड़ों रुपये की इस जमीन को किसी तरह भू-माफिया के चंगुल से मुक्त तो करा दिया गया, लेकिन नगर निगम अपनी ही इस जमीन पर मालिकाना हक नहीं ले पा रहा है। पैमाइश कराके तूदाबंदी होनी है और जहां अतिक्रमण है उस पर निशानदेही करके उसे तोड़ा जाना है। इसके लिए शनिवार को चौथी बार पैमाइश होनी थी।
राजस्वकर्मियों की टीम तो निगम में सुबह से पहुंच गई, लेकिन निगम के जेई और जिम्मेदार अधिकारी ढूढ़े नहीं मिले। आखिरकार नापजोख नहीं हो सकी। इस बीच शिकायतकर्ता मौके पर पहुंच गए। भू-माफिया से साठगांठ के आरोप लगाए। इसके बाद बुधवार को फिर पैमाइश के लिए तय किया गया और इसके लिए सभी को पत्र जारी कर दिए गए।
बता दें कि गाटा संख्या 1677 व 1678 की जमीन पर भू माफिया के द्वारा कब्जा करके अपने निजी खातों में दाखिल खारिज करा लिया गया था। समाजसेवी सर्वेश शुक्ला ने तथ्यात्मक शिकायत करके जमीन को भू-माफिया के कब्जे मुक्त करा लिया। अब यह जमीन फिर नाले और सड़क में दर्ज हो गई है। लेकिन इस करोड़ों रुपये कीमत की जमीन पर नगर निगम अपना मालिकाना हक नहीं ले रहा है। पैमाइश के बाद जमीन पर तूदाबंदी होनी चाहिए, इसके साथ ही जितना भी अतिक्रमण है उसकी निशानदेही करके तोड़फोड़ की जानी चाहिए।
पैमाइश के लिए तीन बार पहले तारीख नियत हो चुकी है। जोकि बिना तूदाबंदी के कारण आधी अधूरी पैमाइश करके छोड़ चुके हैं। शनिवार को चौथी बार पैमाइश की जानी थी, लेकिन राजस्वकर्मियों की टीम पहुंच गई। नगर निगम से कोई नहीं पहुंचा। जेई और संबंधित अधिकारी गायब हो गए। टीम निगम में पहुंची, तब तक शिकायतकर्ता आ गए। उन्होंने वहां अधिकारियों से कहा को जेई को ढूंढ़ा गया, वे नहीं मिले। बाद में बुधवार को फिर से पैमाइश करने के लिए पत्र जारी किया गया है।
आखिर क्यों टालमटोल हो रही पैमाइश में
नगर निगम आखिर अपनी जमीन का मालिकाना हक लेने से क्यों कतरा रहा है। अधिकारी पैमाइश क्यों नहीं कराना चाहते हैं। क्यों जमीन पर अवैध रुपये बनाए गए मकान वालों से कोई साठगांठ है, या कब्जाधारियों के प्रभाव में अधिकारी हैं, या फिर कोई प्रलोभन दिया गया है। लगता है कि निगम अधिकारी भू माफिया की भीतरखाने मदद कर रहे हैं, शायद इसीलिए अपनी ही जमीन को कब्जा लेने में ढिलाई बरती जा रही है। ऐसे तमाम सवाल निगम अधिकारियों पर उठने लगे हैं।
अंटा चौराहा से लोधीपुर रोड तक बन सकती है सड़क
इस जमीन पर कब्जा लेकर नगर निगम अंटा चौराहा से लोधीपुर रोड तक करीब 20 मीटर चौड़ी सड़क बना सकता है। इस सड़क के साथ नाला भी जाएगा। इससे शहर के सदर, बहादुरगंज, जेल, पुलिस और कचहरी समेत करीब एक चौथाई शहर का ड्रेनेज सिस्टम भी सुधर जाएगा। यह नाले और सड़क की जमीन है। इसका सही उपयोग हो जाएगा। यहां अभी तक पक्का नाला भी नहीं बना है। जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पत्र भी जारी हो चुका है। अब मामला एनजीटी में लेकर जाने की बात चल रही है।
अपर आयुक्त फोन नहीं उठाते
नगर निगम के अपर आयुक्त एमए आर्य को इस जमीन के संबंध में पैमाइश के लिए इस बार लगाया गया है। लेकिन पिछले दो दिन से उनका फोन ही रिसीव नहीं हो रहा है। हालांकि पता चला है कि अपर नगर आयुक्त ने पैमाइश कराने के साथ तूदाबंदी के भी निर्देश अधीनस्थों को दिए हैं, ऐसी जानकारी मिली है।
