हल्द्वानी: ‘प्रेम-पत्र’ सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दरोगाओं और सिपाहियों की मनचाही पोस्टिंग निरस्त

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी, अमृत विचार। उत्तराखंड में सत्ताधारी नेताओं और पुलिस में साठगांठ और शह-मात का खेल जारी है। पहले नानकमत्ता के भाजपा विधायक डा. प्रेम सिंह राणा के दबाव में ऊधम सिंह नगर में पुलिसकर्मियों के मनचाहे तबादले कर डाले गए। सोशल मीडिया पर भाजपा विधायक का सिफारिशी पत्र वायरल हुआ तो चौतरफा किरकिरी होनी शुरू …

हल्द्वानी, अमृत विचार। उत्तराखंड में सत्ताधारी नेताओं और पुलिस में साठगांठ और शह-मात का खेल जारी है। पहले नानकमत्ता के भाजपा विधायक डा. प्रेम सिंह राणा के दबाव में ऊधम सिंह नगर में पुलिसकर्मियों के मनचाहे तबादले कर डाले गए। सोशल मीडिया पर भाजपा विधायक का सिफारिशी पत्र वायरल हुआ तो चौतरफा किरकिरी होनी शुरू हो गई।

शासन की नाराजगी के बाद डैमेज कंट्रोल करते हुए रविवार को इन पुलिसकर्मियों के तबादले निरस्त कर दिए गए।
घटनाक्रम के अनुसार सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा से नानकमत्ता विधायक प्रेम सिंह राणा का पिछले दिनों एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। विधायक के लेटर हेड पर सात जून 2021 को लिखे इस पत्र में विधायक राणा ने एसएसपी ऊधम सिंह नगर से तीन दरोगाओं और सात सिपाहियों की मनचाही पोस्टिंग की सिफारिश की थी। यह पत्र सिफारिशी कम और आदेशात्मक ज्यादा लग रहा था। इस पत्र के दो दिन बाद ही दरोगा और सिपाहियों की तबादला सूची जारी हुई और इन पुलिसकर्मियों की पोस्टिंग भी हो गई थी।

सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन 17 जून 2021 को अचानक से विधायक राणा का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह मामला चर्चाओं में आने के साथ ही गरमा गया। शासन ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया तो उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने भी कड़ी नाराजगी जताते हुए इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए आईजी कुमाऊं अजय रौतेला को जांच सौंप दी। आईजी ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी। जिसके बाद एसएसपी ऊधम सिंह नगर ने सभी तबादलों को निरस्त कर दिया। वहीं, डीजीपी ने इन सभी पुलिसकर्मियों से स्पष्टीकरण मांगने के साथ ही इनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

यह कैसा कप्तान
इस पूरे प्रकरण से एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा हो गया है कि आखिर ऊधम सिंह नगर का असली कप्तान कौन है? पुलिस महकमे में यह चर्चा भी जोरों पर है कि यह कैसे कप्तान हैं, जो विधायक के दबाव में आ गए। वहीं, विधायक की सिफारिश अब इन पुलिसकर्मियों को भारी भी पड़ सकती है। सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में शासन स्तर से इस मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

पहले जारी हुई थी 294 की सूची
बताया गया कि विधायक के सिफारिशी पत्र से पहले महकमे के 294 पुलिसकर्मियों की सूची जारी हुई थी। इनमें वे तीन सिपाही भी शामिल थे, जिनके तबादले में संशोधन होना था। चर्चा है कि विधायक के पत्र में अकिंत पांच पुलिसकर्मियों को मनचाही जगह पर भेज भी दिया गया था। इनमें एक दरोगा और चार सिपाही थे।

 

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