सतर्कता के निर्देश
देश में दूसरी लहर का असर कम होने के साथ ही तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। आने वाले हफ्तों में कोरोना के मामले बढ़ने की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए निर्देश जारी किए है। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य …
देश में दूसरी लहर का असर कम होने के साथ ही तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। आने वाले हफ्तों में कोरोना के मामले बढ़ने की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए निर्देश जारी किए है। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में कहा है कि कि पांबदियों में छूट देने का फैसला जमीनी हकीकत के बारे में जानने के बाद लिया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार की ओर से ये निर्देश एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया की उस चेतावनी के बाद जारी किए गए हैं, जिसमें कोरोना की तीसरी लहर के अगले छह से आठ सप्ताह में आने की बात कही गई है। उनका सुझाव है कि जब तक टीकाकरण पूरा नहीं हो जाता तब तक बचाव में किसी तरह की उदासीनता न बरतें। मसलन, मास्क व शारीरिक दूरी का पालन हर हाल में करें।
भले ही कोरोना संक्रमण के मामले घट रहे हैं, लेकिन इसकी वजह से जांच दर में गिरावट नहीं आनी चाहिए। उधर कोरोना वायरस का नया रूप डेल्टा वैरिएंट दुनिया भर में डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को चिंतित किए हुए है। भारत में अभी इसके मरीजों की संख्या ज्यादा नहीं है, बावजूद इसके महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग ने चेताया है कि यही डेल्टा प्लस वैरिएंट कोरोना महामारी की तीसरी लहर का कारण बन सकता है।
भारतीय उद्योग परिसंघ ने भी तीसरी लहर से बचाव के लिए अनलॉक में सावधानी बरतने की जरूरत पर जोर दिया है। राज्य सरकारों को चाहिए कि सभी गतिविधियों को खोलने के लिए सतर्कता का रुख अपनाएं। सभी कुछ खोलने के बजाय देखना चाहिए कि किन गतिविधियों को अनुमति दी जाए। ऐसी गतिविधियों को खोलने से बचा जाए, जिनसे बचा जा सकता है। सामाजिक कार्यक्रमों को अभी रोका जाना चाहिए।
जोखिम बढ़ाने की बजाय सामाजिक कार्यक्रमों के लिए अभी कुछ माह इंतजार किया जाना चाहिए। विभिन्न राज्यों में पाबंदियों ढील देने का सिलसिला जारी है। मगर, इस ढील की आड़ में लोग कोविड नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। राज्यों को टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट और टीकाकरण के फॉर्मूले का विशेष ध्यान रखना चाहिए। राज्यों में टीकाकरण की गति को बढ़ाना होगा।
क्योंकि इस वर्ष दिसंबर तक समूची बालिग आबादी के टीकाकरण के लिए प्रतिदिन औसतन 71 लाख टीकों की खुराक दिए जाने की जरूरत है। समझना होगा कि वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ना और जीतना केवल सरकार के वश में नहीं है। यह लड़ाई तभी जीती जा सकती है, जब एक-एक नागरिक पूरी जागरूकता और सावधानी के साथ इसमें भाग ले।
