आंकड़ों का खेल
केंद्र सरकार देश में कोरोना टीकाकरण की गति एवं संभावनाओं को विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके बावजूद टीकाकरण अभियान शुरु से सवालों के घेरे में रहा है। पहले सरकार ने टीकाकरण की स्पष्ट नीति नहीं बनाई। बार-बार उसमें बदलाव होते रहे। दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय तक ने इसके लिए केंद्र की …
केंद्र सरकार देश में कोरोना टीकाकरण की गति एवं संभावनाओं को विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके बावजूद टीकाकरण अभियान शुरु से सवालों के घेरे में रहा है। पहले सरकार ने टीकाकरण की स्पष्ट नीति नहीं बनाई। बार-बार उसमें बदलाव होते रहे। दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय तक ने इसके लिए केंद्र की आलोचना की थी।
टीका खरीद और वितरण का जिम्मा राज्यों को देने को लेकर आलोचना की गई। टीकों की खरीद का राज्यों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा था, और वे मांग कर रहे थे कि यह जिम्मेदारी केंद्र को लेनी चाहिए। आखिरकार प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों राष्ट्र के नाम संबोधन में टीकाकरण को लेकर नई घोषणाएं कीं। घोषणा पर 21 जून से अमल शुरु हुआ है और लगभग एक महीने पहले लागू किए गए नीतिगत फ़ैसले को उलटते हुए राज्यों से टीकाकरण का नियंत्रण वापस अपने हाथ में ले लिया है।
टीकाकरण को लेकर आ रहे आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 21 जून को 80 लाख से ज्यादा टीके लगाए गए। अचानक एक दिन में 80 लाख से अधिक टीके लगना वाकई आश्चर्यजनक है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम के नये संशोधित दिशा-निर्देशों पर अमल के पहले 72 घंटों में टीके की करीब दो करोड़ खुराकें लगाई गईं। भाजपा शासित प्रदेशों मध्यप्रदेश और कर्नाटक में तो टीकाकरण के ग्राफ में भी काफी उतार-चढ़ाव देखने मिला है।
15 जून से 20 जून तक देश में रोजाना औसतन 30 लाख टीके लगे, तो सवाल ये उठता है कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि 21 जून को टीकाकरण की संख्या 80 लाख के पार पहुंच गई। क्या इसका एक कारण ये था कि 21 तारीख से टीका मुफ्त में लग रहा था। अगर यही वजह थी तो फिर 22 जून को मुफ्त टीका लगाने वालों की संख्या 54 लाख ही क्यों रह गई? सवाल ये भी है कि अब तक तो जरूरत भर के टीके कंपनियां बना नहीं पा रही थीं।
पिछले दिनों ही कई राज्यों में टीकाकरण को इसी वजह से रोका गया था, क्योंकि पर्याप्त स्टॉक नहीं था। फिर अचानक हालात कैसे बदल गए। क्या यह सब सिर्फ रिकॉर्ड बनाने की कोई कवायद थी, या फिर सरकार वाकई इतनी सक्षम थी कि एक दिन में 80 लाख लोगों को टीका लगा दे। यह सक्षमता पहले क्यों नहीं दिखाई दी, जब देश में दूसरी लहर का कोहराम था और टीकाकरण इससे बचाव का एकमात्र रास्ता।
