हल्द्वानी: कुमाऊं में कोवैक्सीन टीकाकरण की दौड़ से बाहर
नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। राज्य में सरकार की तरफ से कोविशील्ड और कोवैक्सीन को कोरोना टीका के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। मई माह से कोवैक्सीन का टीका भी लोगों को लगाना शुरू कर दिया गया, लेकिन अब शासन के आदेश के बाद से कुमाऊं में नए लोगों के टीकाकरण के लिए कोवैक्सीन पर …
नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। राज्य में सरकार की तरफ से कोविशील्ड और कोवैक्सीन को कोरोना टीका के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। मई माह से कोवैक्सीन का टीका भी लोगों को लगाना शुरू कर दिया गया, लेकिन अब शासन के आदेश के बाद से कुमाऊं में नए लोगों के टीकाकरण के लिए कोवैक्सीन पर रोक लगा दी गई है। आदेश के तहत अब नए लोगों को केवल कोविशील्ड का ही टीका लगाया जा रहा है।
कोवैक्सीन स्वदेश में विकसित किया गया कोरोना से बचाव का टीका है। इसे भारत बायोटेक कंपनी ने सरकार के लिए बनाया है। कोविशील्ड वैक्सीन विदेश में विकसित किया गया टीका है और लाइसेंस के तहत स्वदेशी कंपनी ने इसका देश में उत्पादन किया है। जनवरी माह में जब राज्य में कोरोना टीकाकरण की शुरूआत की गई थी तब कोविशील्ड वैक्सीन ही लोगों को लगाई जाती थी। इसके बाद 10 मई से कोवैक्सीन का टीका भी लगाया जाना शुरू कर दिया गया। कोविशील्ड का टीका लगाने के बाद जहां 84 दिन के अंतर के बाद दूसरा टीका लगता है वहीं कोवैक्सीन के टीके बाद 28 से 44 दिनों के बाद दूसरा टीका लगाया जाता है।
अभी कुछ दिनों पहले तक कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों ही टीके लगाए जा रहे थे। लेकिन चार दिन पहले से कोवैक्सीन का टीका अब नए लोगों को लगाना बंद कर दिया गया है। अब यह टीका उन्हीं लोगों को लगाया जा रहा है जिनको कोवैक्सीन का दूसरा टीका लगना है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार की ओर से आदेश है कि नए लोग जो टीकाकरण के लिए आ रहे हैं, उन्हें केवल कोविशील्ड का ही टीका लगाया जाए।
टीके की उपलब्धता को देखते हुए लिया निर्णय
एसीएमओ डा. रश्मि पंत ने बताया कि कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों ही टीके असरकारक हैं लेकिन शासन के आदेश के बाद अब नए लोगों के टीकाकरण में कोवैक्सीन को बंद किया गया है। उन्होंने बताया कि हो सकता है कि कोवैक्सीन की उपलब्धता को लेकर यह निर्णय लिया गया हो।
कोवैक्सीन का टीकाकरण नैनीताल जनपद में केवल राजकीय मेडिकल कॉलेज में किया जा रहा है। इसके अलावा कहीं भी कोवैक्सीन टीका उपलब्ध नहीं है। हालांकि मेडिकल कॉलेज के एक अधिकारी ने यह भी बताया कि उनके पास कोवैक्सीन का अच्छा स्टोर है। लेकिन सरकार ने यह निर्णय क्यों लिया यह समझ से परे है।
