देहरादून: ठगी के धन से खरीदी कोठी और कार, साइबर गैंग की अमेरिका तक मार
देहरादून, अमृत विचार। अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर चलाने के मामले में गिरफ्तार किए गए देहरादून निवासी वैभव गुप्ता और सूद खान से एसटीएफ द्वारा की गई पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। एसटीएफ के डीआईजी नीलेश भरणे ने बताया कि ये आरोपी साइबर अपराध से कमाए गए धन से मंहगे शौक पूरे करते थे। ऐसे …
देहरादून, अमृत विचार। अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर चलाने के मामले में गिरफ्तार किए गए देहरादून निवासी वैभव गुप्ता और सूद खान से एसटीएफ द्वारा की गई पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। एसटीएफ के डीआईजी नीलेश भरणे ने बताया कि ये आरोपी साइबर अपराध से कमाए गए धन से मंहगे शौक पूरे करते थे।
ऐसे करते थे साइबर अपराध
अभियुक्तों द्वारा उत्तराखण्ड राज्य में रहकर अमेरिका में रहने वाली अपने सहयोगी के माध्यम से देहरादून में फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर अमेरिका स्थित कम्प्यूटर सर्विस सेन्टर के नाम से दो टोल फ्री नम्बर गूगल पर प्रसारित कराए जाते थे। अमेरिकी नागरिको द्वारा अपने सिस्टम/डिवाइस को ठीक करने हेतु उक्त टोल फ्री नम्बर पर संपर्क किया जाता था तो इन कॉल सेंटर में बैठे आरोपियों द्वारा स्वयं को विभिन्न सॉफ्टवेयर कम्पनियो के नाम से फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बताया जाता था। अमेरिकी नागरिकों को उनके सिस्टम की तकनीकी खराबी को ठीक करने का झांसा देकर , उनके डिवाइस में साफ्टवेयर डालने का झांसा देकर रकम ऐंठते थे।
100 डालर में खरीदे थे टोल फ्री नंबर
इन आरोपियों ने साइबर अपराध को अंजाम देने के लिए अपने लैपटाप पर आईबीम डायलर और कंप्यूटर डेस्कटॉप पर सॉफ्टफोन डायलर क्लाइंट सॉफ्टवेयर को इंस्टाल कर विदेश में टोल फ्री नम्बर पर फोन किये जाने हेतु प्रयोग किया जाता था। इनके द्वारा दो टोल फ्री नम्बर 100 डालर में द रियल पीबीएक्स कंपनी से खरीदकर घटना को अंजाम दिया जाता था। साथ ही इनके द्वारा द्वारा गूगल पर एक्सेल शीट पर विदेशो नागरिको की जानकारी एकत्रित की जाती थी। जो भी कस्टमर चैक के माध्यम से पेमेन्ट करते थे तो अमेरिका में निवासरत उनके सहयोगी द्वारा अमेरिका स्थित बैंक के माध्यम से उक्त चैकों को कैश करवाकर कमीशन के आधार पर धनराशि दिल्ली स्थित बैंक खाते मे प्राप्त कर धोखाधड़ी करते थे। इन साइबर अपराधियों द्वारा अपराध की कमाई से अपने महंगे शौक पूरे किए जाते थे। डीआईजी ने बताया कि आरोपियों ने देहरादून शहर में 60 लाख रुपये की धनराशि का भवन क्वींस कोर्ट अपार्टमेंट आईएसबीटी के पास लिया था जबकि 16 लाख की लग्जरी कार खरीदी थी।
दून में इससे पहले भी पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर
डीआईजी ने बताया कि इससे पहले जनवरी में एसटीएफ ने देहरादून में ही बसंत विहार क्षेत्र में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया था। इस अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर से सीनियर सिटीजन को बीमा पॉलिसी के नाम पर झांसे में लेकर अमेरिकी नागरिको से धोखाधडी की जाती थी। इसके अलावा एसटीएफ ने अप्रैल में देहरादून में एडी बिल्डर्स के नाम से आईटी पार्क के पास प्रॉपर्टी खरीदने व बेचने के नाम पर संचालित किये जा रहे अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया था, जो अमेरिकन सिटीजन्स को विभिन्न सेवा देने और कंप्यूटर में फर्जी वायरस से सिस्टम को नुकसान से बचाने के नाम से रकम ऐंठते थे।
अनजानी कॉल से रहें सावधान
डीजीपी उत्तराखंड अशोक कुमार का कहना है कि आजकल साइबर अपराधी फर्जी कस्टमर केयर के सहारे लोगों का विश्वास जीतने का प्रयास करते हैं और उसके बाद उनके साथ ठगी करते हैं। उन्होंने अपील की है कि किसी अनजानी कॉल पर एकदम से भरोसा न करें। किसी भी कस्टमर केयर का नंबर आप उसके अधिकृत या पंजीकृत वेबसाइट अथवा स्वयं उसके ऑफिस में जाकर उनका नंबर प्राप्त करें| यदि आपके साथ ठगी हो जाती है तो तुरंत पुलिस की मदद लें।
आरोपियों से यह हुई बरामदगी
1-01 लैपटॉप
2-01 कम्प्यूटर मय मॉनिटर
3- 03 हैडफोन
4-1 वायरलेस राउटर
5- अपराध से सम्बन्धित अन्य दस्तावेज
6-3 पैन ड्राईव
