सम्भल: सपा विधायक इकबाल महमूद ने कहा- मुसलमान बेवजह बदनाम, दलित व आदिवासी बड़ा रहे हैं जनसंख्या
सम्भल। यूपी की योगी सरकार द्वारा प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने से पहले ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ जहां सत्ताधारी पार्टी के नेता और मंत्री इसके सपोर्ट में खड़े हैं, तो वहीं विपक्षी दल इस कानून पर निशाना साध रहे हैं। इसी कड़ी में सपा विधायक इकबाल महमूद ने भी …
सम्भल। यूपी की योगी सरकार द्वारा प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने से पहले ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ जहां सत्ताधारी पार्टी के नेता और मंत्री इसके सपोर्ट में खड़े हैं, तो वहीं विपक्षी दल इस कानून पर निशाना साध रहे हैं। इसी कड़ी में सपा विधायक इकबाल महमूद ने भी इसका विरोध किया है। सम्भल के विधायक इकबाल महमूद का कहना है कि देश में मुसलमानों ने जनसंख्या नहीं बढ़ाई है बल्लि दलित और आदिवासी जनसंख्या बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने सूबे की योगी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार भी जनसंख्या कानून की आड़ में मुसलमानों पर निशाना साध रही है। बता दें कि विधायक नवाब इकबाल महमूद पूर्व केबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं और इस वक्त विधानसभा के उपनेता भी है।
उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों सरकारें जनसंख्या बढ़ाने के मामले में मुसलमानों को बेवजह बदनाम कर रही हैं। देश तथा प्रदेश में तेजी से बढ़ रही जनसंख्या के लिए दलित के साथ आदिवासी जिम्मेदार हैं। सरकारें तो अब जनसंख्या कानून की आड़ में मुसलमानों पर वार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार जनसंख्या नियंत्रण कानून लाती है तो सपा विरोध करेगी। हम लोग तो खुलकर विरोध करेंगे। इसके बाद जनसंख्या कानून का हाल भी एनआरसी ही हो जाएगा।
इसका साथ ही उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव 2022 को देखते हुए यूपी सरकार इस तरह के मुद्दें उछाला रही है। यदि कानून बनाना ही था तो देश की संसद में पास कराते। यह सब भाजपा की वोट बैंक की रणनीति का हिस्सा है। भाजपा इसके जरिए समाज को बांटकर अपना वोट बैंक मजबूत करना चाह रही है। असम में जब एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) पर काम शुरू हुआ तो यदि हजार मुसलमान इसके जद में आए तो दस गुना यानी दस हजार हिंदू आबादी भी प्रभावित हुई तो कानून ठंड बस्ते में चला गया। असम में अनुसूचित जाति व जनजाति की संख्या ज्यादा है।
महमूद ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण कानून खासकर मुसलमानों को ध्यान में रखते हुए लाया गया है। सच्चाई यह है कि इस कानून से सबसे ज्यादा हिंदू समाज प्रभावित होगा। यह चुनावी समय का कानून है और इसे केवल वोट के लिए लाया गया है। भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है और वह कोई भी कानून ला सकते हैं, बना सकते हैं। महंगाई, पेट्रोल मूल्य वृद्धि आदि मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा को कुछ न कुछ करना था तो वह कर रही है।
