हल्द्वानी: 12 हिमालयी राज्यों में स्वास्थ्य खर्च में सबसे निचले पायदान पर उत्तराखंड

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गौरव पांडेय, हल्द्वानी। 12 हिमालयी राज्यों में स्वास्थ्य खर्च के मामले में उत्तराखंड की दयनीय हालत सामने आई है। राज्य इस सूची में सबसे निचले पायदान पर है। उत्तराखंड में स्वास्थ्य खर्च राष्ट्रीय औसत का एक तिहाई भी नहीं है। इससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। कोविड मामलों …

गौरव पांडेय, हल्द्वानी। 12 हिमालयी राज्यों में स्वास्थ्य खर्च के मामले में उत्तराखंड की दयनीय हालत सामने आई है। राज्य इस सूची में सबसे निचले पायदान पर है। उत्तराखंड में स्वास्थ्य खर्च राष्ट्रीय औसत का एक तिहाई भी नहीं है। इससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

कोविड मामलों में हिमालयी राज्यों की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद सोशल डेपलपमेंट फॉर कम्यूनिटी फाउंडेशन ने बीते तीन सालों में जन स्वास्थ्य पर खर्च की गई धनराशि की फैक्टशीट जारी है। यह फैक्टशीट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्टेट फाइनेंस रिपोर्ट 2019 के आधार पर तैयार की गई है।

इसके अनुसार वर्ष 2017 से 2019 के बीच तीन सालों में उत्तराखंड ने अन्य राज्यों की अपेक्षा सबसे कम 5887 रुपए खर्च किए। जबकि अरुणांचल प्रदेश ने सबसे ज्यादा 28417 रुपये खर्च किए। अन्य हिमालयी राज्य सिक्किम ने इस दौरान 21137, मिजोरम ने 16712, हिमाचल ने 10176, जम्मू एवं कश्मीर ने 9469, मणिपुर ने 7755, त्रिपुरा ने 7156 रुपए खर्च किए।

रोजाना महज 5.38 रुपए खर्च कर रहा उत्तराखंड
हल्द्वानी। उत्तराखंड रोजाना अपने नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति महज 5.38 रुपए खर्च कर रहा है। इस मामूली रकम से प्रदेश के निवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट की कमी की असर देखा गया। कोरोना की रोकथाम के दौरान पब्लिक हेल्थ की सांस ही फूल गई। बजट में कमी न होती तो ऐसे हालात सामने न आते।

पड़ोसी राज्य हिमाचल ने 72 फीसदी ज्यादा किया खर्च
हल्द्वानी। फैक्टशीट बताती है कि पूर्वोत्तर के हिमालयी राज्यों ने पिछले तीन सालों के दौरान राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ दिया। उत्तराखंड के पड़ोसी हिमाचल प्रदेश ने ही प्रति व्यक्ति जन स्वास्थ्य पर 72 फीसदी अधिक खर्च किया।

शेष पर्वतीय राज्यों ने राष्ट्रीय औसत से अधिक किया खर्च
हल्द्वानी। फैक्टशीट के अनुसार उत्तराखंड को छोड़कर अन्य हिमालयी राज्यों ने जन स्वास्थ्य को खासी तवज्जो दी। इन राज्यों में जन स्वास्थ्य पर खर्च राष्ट्रीय औसत से अधिक रहा। हिमालयी राज्यों ने राष्ट्रीय औसत से तीन गुना अधिक धनराशि जन स्वास्थ्य पर खर्च
की।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में यह स्पष्ट है कि प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष कम से कम 3800 रुपए खर्च किए जाने चाहिए। लेकिन उत्तराखंड के हालात ठीक नहीं हैं। पिछले तीन सालों में महज 5887 रुपए खर्च किए गए।
अनूप नौटियाल, फाउंउेशन संस्थापक

ये आंकड़े साफ कर देते हैं कि जन स्वास्थ्य के मोर्चे पर उत्तराखंड कितना पिछड़ा है। हम प्रतिव्यक्ति राष्ट्रीय खर्च के औसत से कहीं पीछे हैं। प्रदेश सरकार को स्वास्थ्य की बेहतरी की ओर ध्यान देना होगा।
ऋषभ श्रीवास्तव, रिसर्च हेड, फाउंडेशन

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