बरेली: वाणिज्यकर विभाग के निशाने पर जिले के तीन बड़े मैंथा कारोबारी

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। तीन महीने में तीन बड़े मैंथा कारोबारी करोड़ों की टैक्स चोरी में पकड़े जा चुके हैं। इसके बाद भी फर्जी बिलिंग के सहारे लाखों का गोलमाल जारी है। जांच-पड़ताल में टैक्स चोरी में पकड़े गए व्यापारियों से पूछताछ में जिले के तीन और बड़े मैंथा कारोबारियों के नाम सामने आए हैं जिनका …

बरेली, अमृत विचार। तीन महीने में तीन बड़े मैंथा कारोबारी करोड़ों की टैक्स चोरी में पकड़े जा चुके हैं। इसके बाद भी फर्जी बिलिंग के सहारे लाखों का गोलमाल जारी है। जांच-पड़ताल में टैक्स चोरी में पकड़े गए व्यापारियों से पूछताछ में जिले के तीन और बड़े मैंथा कारोबारियों के नाम सामने आए हैं जिनका प्रदेश में ही नहीं कई अन्य राज्यों में भी बड़ा नेटवर्क है। सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स (सीजीएसटी) विभाग इन पर भी जल्द शिकंजा कसेगा लेकिन इससे पहले अधिकारी ऐसी और सभी फर्मों को भी चिन्हित कर रहे हैं ताकि सब पर एक साथ कार्रवाई कर टैक्स चोरों का भंडाफोड़ हो सके।

जिले में आंवला तहसील के देवचरा गांव व शहर में राजेंद्र नगर में मैंथा ऑयल की बड़ी मंडी है। यहां छोटे व्यापारियों की संख्या करीब दो सौ और बड़े कारोबारियों की संख्या 36 के करीब है। ये सभी हर महीने करोड़ों रुपये का व्यापार करते हैं। जिले के तमाम बड़े कारोबारी इस काम में लगे हैं, जो किसानों से मैंथा ऑयल खरीदकर उसका निर्यात तक करते हैं। इस पूरे कारोबार में तमाम व्यापारी धड़ल्ले से जीएसटी की चोरी भी कर रहे हैं। पिछले साल नवंबर में वाणिज्य कर विभाग की संयुक्त टीम ने बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और बदायूं में मेंथा कारोबारियों के यहां छापेमारी की थी।

जिसमें बरेली और शाहजहांपुर की 22 मैंथा फर्मों की जांच पड़ताल में देवचरा की दो फर्में फर्जी मिलीं थीं जिनसे बिल जारी कर गलत तरीके से आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का लाभ लिया जा रहा था। इसके दो दिन बाद फिर बरेली और शाहजहांपुर की 14 फर्मों पर संयुक्त छापेमारी में जलालाबाद की बाबा ट्रेडर्स और राजर्स ट्रेडर्स नाम से फर्म फर्जी पाई गई थी। फर्मों का मौके पर कोई अस्तित्व नहीं था।

इसके बाद टीम ने कारोबारियों के संपर्क में आने वालों की तलाश में यूपी, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में डेरा डाला। कई लोगों से पूछताछ की। जिसके बाद जीएसटी की मेरठ स्थित निवारक शाखा तीन महीने में जिले के तीन मैंथा कारोबारियों को करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी करने में गिरफ्तार कर चुकी है। यह सभी व्यापारी गिरोह की तरह टैक्स चोरी करते रहे थे। इन कारोबारियों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच में कई अन्य कारोबारियों के तार जुड़े होने का पता अधिकारियों को चला है। जिसके बाद इनके कनेक्शन भी टीम तलाशने में जुट गई है।

टैक्स चोरी करने वालों की ऐसे हुई गिरफ्तारी
जीएसटी की निवारक शाखा ने फर्जी फर्म के जरिये करीब 8.77 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का चूना लगाने वाले आशुतोष सिटी निवासी मेंथा कारोबारी अजय शर्मा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 25 जून को 8.34 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी में आंवला से राहुल गुप्ता की गिरफ्तारी की। 27 जून को बजरिया इनायतगंज के अमित गुप्ता को 14.23 करोड़ की जीएसटी चोरी में पकड़ा। सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। जांच-पड़ताल में अफसरों का पता चला था कि इन व्यापारियों के भी आपस में तार जुड़े थे।

कुछ इस तरह होते हैं फर्जी फर्मों के पंजीकरण
टैक्स चोरी के लिए व्यापारी अपने संबंधियों या नौकरों के नाम पर आसानी से फर्जी फर्में बना लेते हैं। इसमें खेल यह होता है कि पंजीकरण के समय विभाग को नियमानुसार दो दिन में फर्म की जांच कर अपनी रिपोर्ट देनी होती है। तीसरे दिन फर्म को स्वत: ही जीएसटी नंबर जारी हो जाता है। गड़बड़ी करने वाले अक्सर शुक्रवार शाम को जीएसटी में पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन करते हैं क्योंकि शनिवार और रविवार को विभाग में छुट्टी होती है। ऐसे में फर्म के कागज और स्थान का सत्यापन करने का मौका ही नहीं मिलता और सोमवार को यह फर्म स्वयं ही पंजीकृत हो जाती है।

तीन से चार लोग मिलकर बनाते हैं फर्म
जानकार बताते हैं कि तीन से चार लोग मिलकर अलग-अलग नाम से फर्म बना लेते हैं। इसके बाद वह आपस में ही फर्जी बिलिंग कर टैक्स की चोरी करते हैं। जांच-पड़ताल में इनके पकड़े जाने से उन व्यपारियों की भी दिक्कत बढ़ जाती है जो टैक्स के दायरे में आते हैं और टैक्स नियमित रूप से भरते हैं। जीएसटी विशेषज्ञ सुमन वर्मा का कहना है कि इसमें सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि फर्म पंजीकृत कराने के बाद दस्तावेजों का सत्यापन नहीं होता जिसका फायदा उठाकर टैक्स चोरी का खेल चल रहा है। शहर समेत जिले के कई स्थानों से इस तरह की शिकायतें आना आम बात है।

जिले में हैं करीब 40 हजार फर्में
वाणिज्यकर विभाग से मिले आंकड़ों के हिसाब से जिले में करीब 40 हजार छोटी-बड़ी फर्म पंजीकृत हैं। जीएसटी लागू होने से पहले जो भी फर्में पंजीकृत थीं, उनको जीएसटी में पंजीकृत कर दिया था। अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर फर्मों का सत्यापन किया जाता है। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई भी होती है। जीएसटी में जो भी व्यवस्था है, उसी के हिसाब से काम किया जाता है। ऑनलाइन किए जाने वाले आवेदनों का सत्यापन करने के लिए विभागीय टीम स्वयं मौके पर जाती हैं। फिलहाल कोरोना काल में काफी दिनों तक थमा अभियान एक बार फिर शुरू कर दिया गया है।

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