हल्द्वानी: साढ़े चार साल में तीन सीएम…यह कैसी नियति
मुकुल चौहान, हल्द्वानी। तीन चौथाई बहुमत के बाद भी साढ़े चार साल में तीन मुख्यमंत्री। स्पष्ट है कि राजनीतिक अस्थिरता उत्तराखंड की नियति बन गई है। जो कहीं न कहीं भाजपा की राज्य में राजनीतिक और रणनीतिक चूक की तरफ भी इशारा करती है। राज्य में 70 विधानसभा सीटों में से भाजपा के 57 विधायक …
मुकुल चौहान, हल्द्वानी। तीन चौथाई बहुमत के बाद भी साढ़े चार साल में तीन मुख्यमंत्री। स्पष्ट है कि राजनीतिक अस्थिरता उत्तराखंड की नियति बन गई है। जो कहीं न कहीं भाजपा की राज्य में राजनीतिक और रणनीतिक चूक की तरफ भी इशारा करती है।
राज्य में 70 विधानसभा सीटों में से भाजपा के 57 विधायक होने पर मजबूत सरकार के दावे किए जा रहे थे लेकिन पिछले साढ़े चार सालों में हर बार पैदा हो रही राजनीतिक अनिश्चिताओं ने स्थाई सरकार समेत डबल इंजन के दावे फेल कर दिए हैं।
पूर्व में सीएम पद से त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफे के बाद विधानसभा चुनाव 2021 के खैवनहार के तौर पर तीरथ सिंह रावत को भाजपा ने राज्य की कमान सौंपी। लेकिन अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले फिर से मुख्यमंत्री बदलकर राज्य में संगठन और सरकार को असहज स्थिति में ला खड़ा कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का भी यह मानना है कि हर बार का नेतृत्व परिवर्तन सरकार और संगठन दोनों के लिए फायदे का सौदा नहीं है।
राजनीतिक मामलों के जानकार सुशील कुमार सिंह ने कहा कि राज्य मुख्यमंत्री बनाने की प्रयोगशाला बन कर रह गया है। साढ़े चार साल में हर बार नेतृत्व का चेहरा बदलना पार्टी के लिए नफे और नुकसान का सवाल हो सकता है लेकिन राज्य के हित के दृष्टिकोण से यह बिलकुल भी सही नहीं है। हर बार के नेतृत्व परिवर्तन से सरकार की जनहित कारी योजनाओं पर काफी असर पड़ता है। 20 सालों में 13 से ज्यादा मुख्यमंत्री किसी भी राज्य की सेहत के लिए सही नहीं है। इस तरह का राजनीतिक संकट राज्य के विकास के लिए भी घातक है। वहीं भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चुनाव से ठीक पहले नेतृत्व परिवर्तन पार्टी के भी हित में नहीं है।
अगर आंकड़ों पर गौर करें तो नित्यानंद स्वामी 354 दिन, भगत सिंह कोश्यारी 123 दिन, नारायण दत्त तिवारी 1832 दिन, भुवन चंद्र खंडूड़ी 839, रमेश पोखरियाल निशंक 808, फिर से भुवन चंद्र खंडूड़ी 185 दिन, विजय बहुगुणा 690 दिन, हरीश रावत 785 दिन, त्रिवेंद्र सिंह रावत 1567 दिन और तीरथ सिंह रावत 115 दिन मुख्यमंत्री रहे। राज्य में सबसे कम दिन तक भगत सिंह कोश्यारी और तीरथ सिंह रावत बतौर मुख्यमंत्री रहे।
