चंपावत: जैविक चाय के साथ ही अब ध्यान केंद्र के लिए भी जाना जाएगा सिलिंगटाक बागान
देवेंद्र चंद देवा, टनकपुर। देश और देश के बाहर महकने वाली चंपावत की जैविक चाय अब सिर्फ स्वाद का ही अहसास नहीं कराएगी, बल्कि यह चाय बागान लोगों के लिए एकाग्रता बढ़ाने में भी सहयोग करेगा। चाय बागान क्षेत्र में ध्यान और योग केंद्र का निर्माण कराया जाएगा, जिसके लिए कवायद शुरू हो चुकी है। …
देवेंद्र चंद देवा, टनकपुर। देश और देश के बाहर महकने वाली चंपावत की जैविक चाय अब सिर्फ स्वाद का ही अहसास नहीं कराएगी, बल्कि यह चाय बागान लोगों के लिए एकाग्रता बढ़ाने में भी सहयोग करेगा। चाय बागान क्षेत्र में ध्यान और योग केंद्र का निर्माण कराया जाएगा, जिसके लिए कवायद शुरू हो चुकी है। 21 हेक्टेयर चाय बागान क्षेत्र में दिसंबर 2021 तक निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद है।
अपने स्वाद के लिए जाने जाने वाली चंपावत की चाय पेय पदार्थ के अलावा पर्यावरण के संरक्षण, योग-ध्यान और पर्यटन को भी विस्तार देगी। अब सिलिंगटाक के चाय बागान में योग और ध्यान केंद्र बनाया जा रहा है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी लता बिष्ट ने बताया कि पांच लाख रुपए से बनने वाले इस केंद्र का निर्माण ग्रामीण निर्माण विभाग करा रहा है। इस केंद्र में एक साथ 50 लोग ध्यान और योग कर सकेंगे। हरियाली के बीच बनने वाले इस केंद्र से लोग सहजता से ध्यान और योग कर सकेंगे। जिला उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा का कहना है कि इसके लिए निविदा की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस साल के आखिर तक यह केंद्र तैयार हो जाएगा।
जिले के पहाड़ी हिस्सों में 232.20 हेक्टेयर में चाय बागान हैं। इसमें काम कर रहे 454 मजदूर हर साल औसतन 47 हजार किलो चाय का उत्पादन करते हैं। यहां की चाय कोलकत्ता में चाय बोर्ड की नीलामी में हिस्सा तो लेती ही है, साथ ही पिछले साल यहां की चाय यूएसए के यंग माउंटेन टी संस्था ने भी खरीदी थी।
टी-टूरिज्म के लिए नीलामी प्रक्रिया पूरी हुई
सिलिंगटाक चाय बागान में सिर्फ ध्यान और योग केंद्र ही नहीं बनाया जा रहा है, बल्कि सवा साल पहले टी-टूरिज्म के रूप में विकसित करने के तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का ऐलान भी मूर्त रूप लेगा। जिला उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि इसके लिए इस साल फरवरी में 1.05 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे। और अब नीलामी प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। चाय विकास बोर्ड के चंपावत जिले के प्रभारी डेसमंड बर्कबेक ने बताया कि सिलिंगटाक चाय बागान के 21 हेक्टेयर में से चार हेक्टेयर को टी टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां के चाय बागान के दीदार करने वाले सैलानियों को जैविक टी कैफे और टी बुटीक के जरिए स्थानीय चाय पिलाई जाएगी। इसके लिए सैलानियों से टिकट लिया जाएगा।
