नैनीताल: गेठिया की वादियों में आज भी गूंजता है… सुहाना सफर और ये मौसम हसीं

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पवन सिंह कुंवर, नैनीताल। बॉलीवुड के ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन लोगों का प्यार आज भी उनके लिए जिंदा है। दिलीप कुमार का नैनीताल से खास नाता रहा है। वह अपनी मशहूर फिल्म मधुमति की शूटिंग के लिए नैनीताल के गेठिया गांव आए थे। यही नहीं, उस समय गांव …

पवन सिंह कुंवर, नैनीताल। बॉलीवुड के ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन लोगों का प्यार आज भी उनके लिए जिंदा है। दिलीप कुमार का नैनीताल से खास नाता रहा है। वह अपनी मशहूर फिल्म मधुमति की शूटिंग के लिए नैनीताल के गेठिया गांव आए थे। यही नहीं, उस समय गांव की ही युवती यशोदा आर्य ने इस फिल्म की हीरोइन वैजयंती माला का एक सीन बखूबी अंजाम दिया था, जो इस गांव के लिए खुशनुमा याद बन गया था। दिलीप कुमार के निधन की खबर से उनके चाहने वालों को गहरा सदमा लगा है। उनकी यादें पर्यटन नगरी नैनीताल के लोगों के दिलो दिमाग में अभी भी जिंदा हैं।

नैनीताल की कई लोकेशन में हुई थी शूटिंग
दिलीप कुमार को गेठिया गांव के लोग आज भी याद करते हैं। दिलीप कुमार 50 के दशक में मधुमति की शूटिंग के लिए जब नैनीताल आए थे तो उनके फैंस अपने पसंदीदा कलाकार के दीदार के लिए पैदल ही कई किलोमीटर का रास्ता तय कर शूटिंग देखने पहुंचते थे। साल 1958 में आई इस फिल्म की शूटिंग के दौरान वह यहां एक महीने से भी ज्यादा दिन रुके थे। मधुमति फिल्म के कई यादगार दृश्य नैनीताल, रानीखेत, घोड़ाखाल और गेठिया गांव की लोकेशन में कैद किए गए थे।

पहाड़ पर दौड़ना मुश्किल था वैजयंती के लिए
भीमताल के ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट बताते हैं कि दिलीप कुमार और वैजयंती माला की दीवानगी लोगों में इस कदर थी कि शूटिंग देखने के लिए नैनीताल, भीमताल और आसपास के क्षेत्रों से लोग पैदल ही शूटिंग स्थल पर पहुंच जाते थे। दिलीप कुमार और वैजयंती माला ने गेठिया सैनिटोरियम के पास चीड़धार में शूटिंग की थी। फिल्म की ज्यादातर शूटिंग चीड़धार में ही हुई थी। ‘सुहाना सफर और ये मौसम हसीं’ और ‘चढ़ गयो पापी बिछुआ’ जैसे गीतों को इन लोकेशन में शूट किया गया था। शूटिंग के दौरान एक सीन में अभिनेत्री वैजयंती माला को पहाड़ पर दौड़ना था, जो उनके लिए बेहद मुश्किल था।

तब यशोदा को मिला था वह रोल
ग्राम सभा गेठिया की सावित्री देवी बताती हैं कि फिल्म की हीरोइन वैजयंती माला को एक सीन पहाड़ी क्षेत्र में दौड़कर पूरा करना था। वैजयंती जब यह सीन नहीं कर पाईं थीं तो शूटिंग के दौरान फिल्म के निर्देशक बिमल रॉय की निगाह दर्शकों की भीड़ में मौजूद गेठिया गांव की बेटी यशोदा आर्य पर पड़ी थी। तब वह सीन यशोदा को दिया गया था और यशोदा ने वह सीन बखूबी अंजाम दिया था। हालांकि यशोदा अब इस दुनिया में नहीं हैं।

आज भी गुनगुनाते हैं वो सदाबहार नगमें
ग्राम सभा गेठिया की कमला देवी बतातीं हैं कि फिल्म मधुमती के गानों की शूटिंग इसी गांव और आसपास ही हुई थी। जो हिंदी सिनेमा के सदाबहार गीतों में शामिल हैं। इन गीतों को आज भी यहां के लोग गुनगुनाते हैं। दिलीप कुमार और मधुमति फिल्म की शूटिंग की यादें यहां लोगों के दिलों में आज भी कायम हैं।

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