कैबिनेट विस्तार
मई 2019 में अपना दूसरा कार्यकाल आरंभ करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पहली बार केंद्रीय मंत्रि परिषद में बहुप्रतिक्षित फेरबदल व विस्तार किया है। आज तक उनकी टीम 53 मंत्रियों की ही थी, जबकि नियमानुसार मंत्रिपरिषद में सदस्यों की अधिकतम संख्या 81 हो सकती थी। इससे पहले अपने पहले कार्यकाल में …
मई 2019 में अपना दूसरा कार्यकाल आरंभ करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पहली बार केंद्रीय मंत्रि परिषद में बहुप्रतिक्षित फेरबदल व विस्तार किया है। आज तक उनकी टीम 53 मंत्रियों की ही थी, जबकि नियमानुसार मंत्रिपरिषद में सदस्यों की अधिकतम संख्या 81 हो सकती थी।
इससे पहले अपने पहले कार्यकाल में मोदी ने छह महीने के अंदर मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया था और उनकी संख्या 45 से बढ़ाकर 66 कर दी थी। अपनी सरकार की दूसरी वर्षगांठ के चंद महीनों बाद ही जुलाई 2016 में मोदी ने एक बार फिर मंत्रिमंडल में फेरबदल किया था और मंत्रियों की संख्या बढ़ाकर 78 कर दी थी। दूसरे कार्यकाल में मंत्रिमंडल विस्तार का अनुमान काफी पहले से लगाया जा रहा था। अब मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार ऐसे समय में किया गया है, जब उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब व उत्तराखंड जैसे राज्यों में चुनाव अगले साल होने वाले हैं।
आसन्न विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ही उत्तराखंड में भाजपा को चार माह में दो मुख्यमंत्री बदलने पड़े। तय है कि केंद्रीय नेतृत्व की निगाहें उत्तर प्रदेश पर टिकी होंगी। यूपी चुनाव को देखते हुए सोशल इंजीनियरिंग के तहत प्रदेश से एससी, ओबीसी और ब्राह्मण वर्ग को भी खुश करने की कवायद की गई है। जिन 43 मंत्रियों ने आज शपथ ली है, उनमें 27 ओबीसी समुदाय से हैं।
मई में पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे ने साफ संदेश दिया था कि लोग प्रधानमंत्री मोदी को भले पसंद करते हों, परंतु उनका शासन मॉडल उन्हें पसंद नहीं है। 2014 में देश ने एक मजबूत और फैसले करने वाले नेता को वोट दिया था। 2019 में देश ने फिर मजबूत और फैसले करने वाले नेता और विकास के गुजरात मॉडल के पक्ष में वोट दिया। 2021 में पीएम मोदी की लोकप्रियता कायम है लेकिन उनके शासन मॉडल को लेकर संदेह बढ़ता जा रहा है।
कोविड की महामारी ने खामियों को उजागर कर दिया। सत्ता और निर्णय प्रक्रिया के अति केंद्रीकरण ने शासन के सभी स्तरों पर कार्यकुशलता में कमी और उदासीनता को जन्म दिया। आज के विस्तार में पूरे देश को प्रतिनिधित्व दिया गया है। कामकाज के आधार पर सात मंत्रियों का दर्जा बढ़ाया गया है तो कई दिग्गज मंत्रियों को इस्तीफा भी देना पड़ा। साथ ही कई दिग्गज मंत्रिमंडल में शामिल किए गए हैं।
