टनकपुर: जंगली लिंगड़े की सब्जी खाने से हुई फूड पॉइजनिंग, घर वाले कराते रहे झाड़-फूंक, एक की मौत
टनकपुर, अमृत विचार। चम्पावत जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर खटोली गांव में तीन दिन पूर्व जंगली लिंगड़े की सब्जी खाने से एक किशोर की मौत हो गई है, जबकि परिवार के सात सदस्यों की हालत खराब हो गई है। जिन्हें आनन-फानन में चम्पावत के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना …
टनकपुर, अमृत विचार। चम्पावत जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर खटोली गांव में तीन दिन पूर्व जंगली लिंगड़े की सब्जी खाने से एक किशोर की मौत हो गई है, जबकि परिवार के सात सदस्यों की हालत खराब हो गई है। जिन्हें आनन-फानन में चम्पावत के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना से स्वास्थ्य महकमे व प्रशासन में खासा हड़कंप मच गया है। इधर घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
चम्पावत के खटोली गांव निवासी गंगा सिंह के पुत्र कमल सिंह व पान सिंह को सात जुलाई को उनके गांव के ही एक रिश्तेदार ने जंगली लिंगड़े की सब्जी लाकर दी। आठ जुलाई को कमल सिंह के परिवार ने दिन में तो पान सिंह के परिवार ने शाम को इसकी सब्जी बनाकर खाई। सब्जी खाने के बाद कमल सिंह के पुत्र अंकित सिंह (11), संजय (17), पुत्री रिया (14) की तबीयत खराब हो गई।
वहीं पान सिंह के परिवार में पत्नी शांति देवी (40) पुत्री सरोज (18) पुत्र भोला सिंह (13), उत्तम सिंह (22) और पवन सिंह (16) की तबीयत खराब हो गई। सभी को उल्टियां होने लगी। जबकि यही सब्जी खाने वाले कमल के 86 वर्षीय पिता गंगा सिंह व 70 वर्षीय मां गोविंदी देवी समेत परिवार के अन्य सभी वरिष्ठ सदस्यों का स्वास्थ्य ठीक है।
परिवार के लोग अस्पताल जाने के बजाय इसे देवी-देवताओं का मामला मानते हुए झाड़-फूंक व पूजा-पाठ में लग गए। इस दौरान समय पर उपचार न मिल पाने से नौ जुलाई को पान सिंह के पुत्र पवन सिंह की मौत हो गई। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। जिसके बाद सभी को जिला अस्पताल चम्पावत लाया गया। गांव रोड से दूरी पर होने के कारण सभी को अस्पताल पहुंचने में रात करीब डेढ़ बज गए। जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने सभी को भर्ती कर उपचार करना शुरू किया।
जहां पान सिंह के पुत्र उत्तम सिंह व कमल के पुत्र संजय की तबियत ज्यादा गंभीर बनी हुई है। उनके उपचार में फिजिशियन डॉ. अजय कुमार समेत अन्य स्टॉफ जुटा हुआ है। बताया कि सभी की लीवर व किडनी की जांच कराई जा रही है। घटना की सूचना पर एडीएम टीएस मर्तोलिया ने भी अस्पताल पहुंच मरीजों का हाल चाल जाना और बेहतर उपचार के निर्देश दिए।
टनकपुर। सरकारी अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरके जोशी ने बताया कि सभी लोगों को फूड प्वाइजनिंग हुई है। ये लोग झाड़ फूंक में समय न गंवाते तो पवन की जान बच सकती थी। उन्होंने कहा कि अगर तबियत खराब होने के बाद आठ जुलाई की शाम या फिर नौ जुलाई की सुबह सभी लोगों को अस्पताल ले आते तो सभी ठीक हो जाते और पवन की जान बच जाती। अस्पताल में देरी से पहुंचने के कारण लिंगड़े में मौजूद विषाक्त पदार्थ पूरे शरीर में फैल गया। जिसका असर लीवर व किडनी पर पड़ता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वह जंगल से लाई हुई लिंगड़े, मशरूम आदि सब्जियों को खाने से बचें। खेत में या बाजार में आने वाली सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही खाएं।
