बागेश्वर: कपकोट के सुमगढ़ में बरसात बनी काल, परिवार के तीन सदस्यों की मौत, गौशाला में बंधे पशु भी जमींदोज

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बागेश्वर, अमृत विचार। कपकोट के सुमगढ़ गांव के ऐठान तोक में रविवार की सुबह बरसात एक परिवार के लिए काल बन गयी। बरसात से आए मलबे ने गांव में एक मकान में परिवार के साथ सो रहे तीन सदस्यों को मौत की नींद सुला दिया। घर में सो रहे गोविंद सिंह के बड़े पुत्र ने …

बागेश्वर, अमृत विचार। कपकोट के सुमगढ़ गांव के ऐठान तोक में रविवार की सुबह बरसात एक परिवार के लिए काल बन गयी। बरसात से आए मलबे ने गांव में एक मकान में परिवार के साथ सो रहे तीन सदस्यों को मौत की नींद सुला दिया। घर में सो
रहे गोविंद सिंह के बड़े पुत्र ने किसी तरह भाग कर जान बचाई। हादसे में गौशाला में बंधे पशु भी मलबे की भेंट चढ गए।

आपदा कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कपकोट के सुमगढ़ गांव में शनिवार की रात तेज बरसात हुई। जिससे रविवार की सुबह लगभग तीन बजे समीप की पहाड़ी से मलबा आया तथा सुमगढ़ के ऐठान तोक निवासी गोविंद सिंह के मकान को चपेट मेंं ले लिया और देखते ही देखते मकान जमींदोज हो गया। जिससे 38 वर्षीय गोविंद सिंह पुत्र प्रताप सिंह समेत उसकी 32 वर्षीय पत्नी खष्टी देवी व सात वर्षीय पुत्र हिमांशु मलबे में दब गए।

जबकि बडे़ पुत्र गुलशन ने घर से भागकर किसी तरह जान बचाई तथा ग्रामीणों को सूचना दी। ग्रामीणों ने इसकी सूचना
प्रशासन व पुलिस को दी तथा स्वयं राहत कार्य करने का प्रयास किया परंतु मकान व परिवार के सदस्यों के मलबे में बुरी तरह से दबे होने व अंधकार होने के कारण ग्रामीण राहत कार्य नहीं कर सके। सुबह ग्रामीणों ने राहत कार्य प्रारंभ किया। गांव में फोन नेटवर्क न होने के कारण प्रशासन को इसकी सूचना सुबह ही दी जा सकी।

सुबह साढे़ छह बजे सूचना मिलने पर कपकोट से एचडीआरएफ व प्रशासन तथा पुलिस की टीम घटना स्थल को रवाना हुई। इस बीच कपकोट- बघर मोटर मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत व बचाव दल को लगभग पांच किमी पैदल चलना पड़ा। जिला आपदा अधिकारी शिखा सुयाल ने बताया कि अपर जिलाधिकारी चंद्र सिंह इमलाल, उपजिलाधिकारी कपकोट प्रमोद कुमार भी घटनास्थल पहुंच चुके हैं तथा मार्ग को खोल दिया गया है। प्रशासन के निर्देश पर तीनों मृतकों का पोस्टमार्टम गांव के श्मशान घाट में किया जाएगा जिसके लिए चिकित्सकों की टीम भी वहां पहुंच गई है।

दादा के घर में न होने से बची जान
बगेश्वर। शनिवार की रात हुई घटना में घर के मुखिया प्रताप सिंह अपनी रिश्तेदारी में गांसी गांव गए थे जिससे उनकी जान बच गई। जानकारी के अनुसार गोविंद सिंह के पिता प्रताप सिंह अपनी रिश्तेदारी में गए थे जिससे उनकी जान बच गई। उन्हें ग्रामीणों ने आज सुबह घटना की सूचना दी तो वे भी गांव पहुंच गए। घटना के बाद से वे सदमे में हैं। जबकि उनका पोता 13 वर्षीय गुलशन तेज बरसात से आए मलबे की अनहोनी को भांपते हुए घर से निकल गया। घटना के बाद से दादा व पोते सदमे में हैं।

फोन नेटवर्क न होने से मुश्किलें बढी
बगेश्वर। कपकोट के कई इलाकों में फोन नेटवर्क न होने के कारण प्रशासन को इसकी सूचना समय पर नही दी जा सकी। वहीं घटना स्थल पर कपकोट तहसील मुख्यालय से टीम के पहुंचने पर रास्ते में बंद रास्तों व तेज बरसात ने भी दिक्कत पैदा की।

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