काशीपुर: अधिग्रहित जमीन का मुआवजा पाने को पिछले पांच साल से अधिकारियों के चक्कर काट रहा परिवार, दी आत्महत्या की चेतावनी
काशीपुर, अमृत विचार। एनएचएआई द्वारा अधिग्रहित की गई ढाई एकड़ जमीन के मुआवजे के लिए ग्राम बांसखेड़ा खुर्द का परिवार चार-पांच साल से एसएलओ समेत अन्य अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। इसके बावजूद परिवार को आश्वसन के अलावा और कुछ नहीं मिल पा रहा। अब परिवार ने शीघ्र मुआवजा नहीं मिलने पर आत्महत्या की …
काशीपुर, अमृत विचार। एनएचएआई द्वारा अधिग्रहित की गई ढाई एकड़ जमीन के मुआवजे के लिए ग्राम बांसखेड़ा खुर्द का परिवार चार-पांच साल से एसएलओ समेत अन्य अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। इसके बावजूद परिवार को आश्वसन के अलावा और कुछ नहीं मिल पा रहा। अब परिवार ने शीघ्र मुआवजा नहीं मिलने पर आत्महत्या की चेतावनी दी है।
बांसखेड़ा खुर्द गांव के निवासी महिपाल सिंह की ओर से लिखे गए खुले पत्र में कहा गया कि उसके परिवार की साढ़े तीन एकड़ जमीन ग्राम गिन्नीखेड़ा में थी, जो विरासत में बंट गई। जमीन के तीन अन्य सह खातेदार हो गए। साल 2013 में एनएचएआई की ओर से ढाई एकड़ जमीन को अधिग्रहित कर लिया गया। आधा मुआवजा तीन खातेदारों में बांट दिया गया। शेष मुआवजा नहीं दिया गया। ऐसे में उन्होंने विशेष भू-अध्यापित अधिकारी के खिलाफ ऑर्बिटेशन का वाद दायर किया। उस मुकदमे का फैसला भी उसके हक में आ गया। इसके बाद भी उन्हें मुआवजा नहीं दिया गया। कई साल से उनका परिवार मुआवजने के लिए भटक रहा है। अब उनके मन में आत्महत्या करने का ख्याल आ रहा है।
15 दिन पूर्व महिपाल सिंह आए थे। तीनों परिवारों और एनएचएआई की एक बैठक रखी थी। उस दिन एनएचएआई से कोई नहीं पहुंचा था। दोबारा से बैठक की जाएगी। कोर्ट ने भी मुआवजा देने के लिए आदेश कर दिया है। एनएचएआई मुआवजा देने में देरी कर रहा है। जमीन का मुआवजा दिलाने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा।
-आकांक्षा वर्मा, संयुक्त मजिस्ट्रेट, काशीपुर
जमीन के मुआवजा के लिए आत्महत्या करने का पत्र लिखने की जानकारी नहीं है। एसडीएम से जानकारी लेकर मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
-रंजना राजगुरू, डीएम, ऊधमसिंह नगर
