नई जनसंख्या नीति
विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को उत्तर प्रदेश जनसंख्या नीति जारी की। फिलहाल उत्तर प्रदेश में प्रजनन दर 2.9 है, सरकार का लक्ष्य है कि इसे कम करके 2.1 तक लाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दो बच्चों के बीच सही अंतर रखना भी जरूरी है। वरना बच्चों में …
विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को उत्तर प्रदेश जनसंख्या नीति जारी की। फिलहाल उत्तर प्रदेश में प्रजनन दर 2.9 है, सरकार का लक्ष्य है कि इसे कम करके 2.1 तक लाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दो बच्चों के बीच सही अंतर रखना भी जरूरी है। वरना बच्चों में कुपोषण का खतरा रहता है।
जिन देशों, राज्यों ने इसके लिए प्रयास किए, वहां सकारात्मक नतीजे देखने को मिले। विश्व में चीन के बाद भारत की जनसंख्या सबसे ज्यादा है और आज भी तेज गति से बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश की जनसंख्या लगभग 23 करोड़ है। 2011 की जनगणना के मुताबिक प्रदेश की कुल जनसंख्या 19 करोड़ 98 लाख थी। जो कि भारत की कुल आबादी का 16.5 फीसदी थी। इस दृष्टि से प्रदेश में नई जनसंख्या नीति समय की मांग थी।
उधर राज्य विधि आयोग ने उत्तर प्रदेश जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण एवं कल्याण) विधेयक-2021 का प्रारूप तैयार कर लोगों से सुझाव मांगे हैं। मसौदे में इस बात की सिफ़ारिश की गई है कि ‘दो बच्चों की नीति’ का उल्लंघन करने वालों को स्थानीय निकाय के चुनाव में हिस्सा लेने की इजाज़त नहीं हो। नीति का उल्लंघन करने वाले को सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने, पदोन्नति और किसी भी प्रकार की सरकारी सब्सिडी प्राप्त करने से वंचित कर दिया जाएगा।
इसी के साथ प्रदेश में इस मसौदे पर बहस शुरू हो गई है। उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि नीति को तैयार करने का मक़सद है कि उत्तर प्रदेश का ‘सर्वांगीण विकास हो।’ वहीं विपक्ष ने इसे चुनाव के पहले लोगों का ‘ध्यान भटकाने की एक कोशिश’ बताया है। मसौदे के कई प्रावधानों की वजह से इस क़ानून को लाने की मंशा और नीयत पर भी सवाल उठ रहे हैं।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के अनुसार पूरे देश में अधिकतर लोग दो से ज्यादा बच्चे नहीं चाहते हैं तो दो बच्चों वाला क़ानून क्यों जरूरी है। बढ़ती आबादी एक समस्या है, लेकिन क्या आबादी की समस्या से निपटने का यह तरीक़ा है? केरल और देश के कई राज्यों को देखें तो बिना इस तरह की नीतियों और क़ानूनों के ही प्रजनन दर कम कम हो रही है।
विपक्षी कह रहे हैं ये मुद्दा चुनाव को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है। बढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणामों के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लेना चाहिए। अनियंत्रित आबादी सामाजिक आर्थिक और प्राकृतिक असंतुलन की बड़ी वजह है। जनजागरण अभियान चलाकर लोगों को जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रेरित करना चाहिए।
