रामपुर : बढ़ती महंगाई के खिलाफ भाकियू का प्रदर्शन, की नारेबाजी
रामपुर/स्वार,अमृत विचार। भारतीय किसान यूनियन के तहसील अध्यक्ष अमीर अहमद के नेतृत्व में दर्जन भर कार्यकर्ता और किसानों ने तहसील पहुंच कर महंगाई के खिलाफ हुंकार भरते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर किसान विरोधी होने के साथ आम आदमी विरोधी बताया। सात माह से किसान दिल्ली बॉर्डर पर …
रामपुर/स्वार,अमृत विचार। भारतीय किसान यूनियन के तहसील अध्यक्ष अमीर अहमद के नेतृत्व में दर्जन भर कार्यकर्ता और किसानों ने तहसील पहुंच कर महंगाई के खिलाफ हुंकार भरते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर किसान विरोधी होने के साथ आम आदमी विरोधी बताया। सात माह से किसान दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार उन्हें नजर अंदाज किए हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा नरपतनगर नगर पंचायत में बिजली संकट बना हुआ हैबाद में भाकियू शिष्टमंडल उप जिलाधिकारी यमुनाधर से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपा।ज्ञापन में बिजली में सुधार, बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण, क्रेडिट कार्ड पर फसल बीमा की व्यवस्था खत्म करने और पिछला बीमा कवर दिलाए जाने की मांग शामिल हैं।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि मांगे नहीं मानी गईं तो किसान बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस अवसर पर तहसील अध्यक्ष अमीर अहमद, कदीर अहमद, तस्वीर अहमद, सद्दाम, फैसल, मुजाहिद नूर, शकील अहमद, अलाउद्दीन, जफर हसन, समीर, फुरकान अली, बालाजी, अजीत सिंह, लखविंद्र सिंह, सलामत जान और मेहबूब अली आदि रहे।
कृषि कानूनों के सही तरीके से लागू होते ही किसान खत्म हो जाएंगे : इरफान
भोट, कृषि बिलों के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता 47वें दिन भी कोयला टोल प्लाजा पर बेमियादी धरना जारी रहा। इस दौरान आक्रोशित किसानों ने केन्द्र सरकार को जमकर नारेबाजी व प्रदर्शन कर तीनों कृषि कानूनों को वापस किए जाने की मांग की।
केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानूनों को वापस किए जाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन के मंडल उपाध्यक्ष मोहम्मद तालिब के नेतृत्व में नेशनल हाइवे में कोयला टोल प्लाजा में किसानों का बेमियादी धरना 47वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान धरने पर बैठे किसानों को सम्बोधित करते हुए बिलासपुर तहसील अध्यक्ष इरफान हसन ने कहा तीनों कृषि कानूनों के सही तरीके से लागू होते ही देश से किसान खत्म हो जाएंगे।
औद्योगिक घरानों के बंधुआ मजदूर रह जाएंगे। किसान आंदोलन को सात महीने ही हुए है। सरकार अभी इन कृषि कानूनों से किसानों व देश को होने वाले नुकसान को समझ नहीं पा रही है। जल्दी ही सरकार की भी समझ में आ जाएगा। कानून किसानों के लिए नुकसान देह और और फिर वह कानून भी वापस लेगी, इसलिए किसान हिम्मत न हारे। धरने पर डटे रहे। किसानों के कुछ महीने आंदोलन करने से एक फसल ही नष्ट होगी।
अगर यह कृषि कानून लागू हो गए तो यह देश के किसानों का भविष्य ही चौपट हो जाएगा, इसलिए किसानों को हिम्मत नहीं हारना है। जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान तालिब, शाकिर अली, अनीस अहमद, छिद्दा अली, नदीमअहमद, मोहम्मद नौशाद, मुनव्वर आलम, मुजफ्फरअली, शकीलअहमद, मोहम्मद रिजवान, फरीद अहमद, इकराम, सतनाम, रामगोपाल, जगदीश, अब्दुल मुस्तफा आदि मौजूद रहे।
