टनकपुर: 38 घंटे बाद राष्ट्रीय राजमार्ग में दौड़े वाहन

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टनकपुर, अमृत विचार। आखिरकार बरसात थमने के बाद ही टनकपुर पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पूरे 38 घंटे बाद खुल पाया  इस दौरान मैदानी और पर्वतीय क्षेत्र को जाने वाले सैकड़ों यात्री राजमार्ग में फंसे रहे।शुक्रवार को पर्वतीय क्षेत्रों और जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर और बनबसा में धूप खिलने से लोगों ने राहत की सांस ली …

टनकपुर, अमृत विचार। आखिरकार बरसात थमने के बाद ही टनकपुर पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पूरे 38 घंटे बाद खुल पाया  इस दौरान मैदानी और पर्वतीय क्षेत्र को जाने वाले सैकड़ों यात्री राजमार्ग में फंसे रहे।शुक्रवार को पर्वतीय क्षेत्रों और जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर और बनबसा में धूप खिलने से लोगों ने राहत की सांस ली है। इधर टनकपुर पूर्णागिरि मार्ग 7 दिन बाद भी नहीं खुल सका है, वही बरसात थमने के बाद प्रशासन के निर्देशन में लोनिवि द्वारा पूर्णागिरि मार्ग के हनुमान चट्टी के पास गिरे बड़े बोल्डरों को हटाने के लिए कटर मशीन द्वारा तेजी से कार्य किया जा रहा है।

चम्पावत जिले में बारिश गुुरुवार की शाम से रुक गई थी। शुक्रवार को धूप  निकलने से लोगों ने 1 सप्ताह बाद राहत की सांस ली। उससे भी बड़ी राहत तीन दिन से बंद पड़े टनकपुर-पिथौरागढ़ राजमार्ग खुलने से मिली। शुक्रवार की सुबह 9:50 बजे स्वाला के पास आए मलबे को हटाकर लगभग 38 घंटे बाद एनएच को सुचारू किया गया। बुधवार की शाम 37 घंटे बाद सड़क खुली लेकिन कुछ घंटे बाद ही फिर बंद हो गई। इस बीच सड़क में फंसे वाहनों को निकाल लिया गया था।

गुरुवार की सुबह आठ बजे अमोड़ी के पास और बाद में धौन, स्वाला, बेलखेत, झालाकुड़ी बैंड समेत सात स्थानों पर मलबा आ गया। जिससे दिनभर सड़क नहीं खुल पाई। इस दौरान 100 से अधिक वाहनों में 200 से अधिक यात्री फंसे रहे। शुक्रवार को धूप निकलने के बाद मलबा हटाने के काम में तेजी आई और एनएच को सुचारू कर दिया गया।

अमोड़ी समेत सात स्थानों पर मलबा गुरुवार की देर शाम तक हटा लिया गया था। लेकिन स्वाला के पास लगातार गिर रहे मलबे के कारण सड़क खोलने में दिक्कत हो रही थी। शाम सात बजे मलबा हटाने का काम बंद कर दिया गया था। शुक्रवार की सुबह से ही फिर से मशीनें मलबा हटाने में जुट गई।

एनएच के ईई एलडी मथेला ने बताया कि शुक्रवार की सुबह 9:50 बजे एनएच को सुचारू कर लिया गया है। इस दौरान मार्ग में फंसे सैकड़ों यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा जबकि जिला प्रशासन के साथ कई सामाजिक संगठनों द्वारा मार्ग में फंसे यात्रियों के भोजन की व्यवस्था भी की गई थी।मार्ग के खुल जाने के बाद यात्री अपने-अपने स्थानों को रवाना हो गए। टनकपुर और चम्पावत से वाहनों की आवाजाही भी शुरू हो गई है।

इधर चार दिन से बंद करीब डेढ़ दर्जन ग्रामीण सड़कों में से चार को आवागमन के लिए सुचारू कर दिया गया है, जबकि 14 सड़कें अभी भी बंद हैं। इन सड़कों को खोलने का काम जारी है।जिले के मैदानी क्षेत्र  के शारदा नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है जबकि शारदा नदी के उफान के कारण घाट क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा है।

पूर्णागिरि मार्ग पर आये चट्टान को काटने का काम शुरू
टनकपुर। क्षेत्र और पहाड़ों में हुई भारी वर्षा के कारण 1 सप्ताह पूर्व टनकपुर पूर्णागिरि मार्ग के हनुमान चट्टी के पास गिरे बड़े बोल्डरों को हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। बीच में भारी वर्षा होने के कारण किरोड़ा नाला और बाटनागाड पर जल स्तर अधिक होने व मलबा आने से कटर मशीन हनुमान चट्टी नहीं जा पाई थी।

शुक्रवार की सुबह बाटना गाड़ में आए मलबे को हटाकर कटर मशीन को हनुमान चट्टी के पास भेजा गया। लोनिवि के ईई एपीएस बिष्ट ने बताया कि क्षेत्र में आए चट्टान को कटर मशीन द्वारा हटाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है और जल्दी ही मार्ग को सुचारू कर दिया जाएगा। पूर्णागिरि के दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं के कई वाहन भैरव मंदिर के पास ही फंसे हुए हैं। इधर अभी भी पूर्णागिरि क्षेत्र में पानी और बिजली की व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी है।

बताया जाता है कि पिछले दिनों भारी वर्षा के कारण पूर्णागिरि मार्ग में जगह-जगह विद्युत पोल और तार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिसके कारण पूर्णागिरि क्षेत्र के लोगों को भारी दिक्कतें हो रही हैं। साथ ही इस समय पैदल ही आ रहे श्रद्धालु भी पानी व बिजली व्यवस्था ना होने से  खासे परेशान हैं। समाचार लिखे जाने तक देर शाम तक पूर्णागिरि मार्ग को सुचारू नहीं किया जा सका था।

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