हल्द्वानी: चातुर्मास के चलते चार महीनों तक नहीं बजेंगी शहनाई

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हल्द्वानी, अमृत विचार। आषाढ़ शुल्क एकादशी 20 जुलाई से चातुर्मास शुरू हो गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुमार्स के दौरान भगवान विष्णु शयन के लिए क्षीर सागर में चले जाते हैं। इस अवधि में शादी- विवाह, जनेऊ संस्कार व दीक्षा आदि जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, क्योंकि भगवान विष्णु के शयन यानि …

हल्द्वानी, अमृत विचार। आषाढ़ शुल्क एकादशी 20 जुलाई से चातुर्मास शुरू हो गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुमार्स के दौरान भगवान विष्णु शयन के लिए क्षीर सागर में चले जाते हैं। इस अवधि में शादी- विवाह, जनेऊ संस्कार व दीक्षा आदि जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, क्योंकि भगवान विष्णु के शयन यानि निद्रा में जाने से विवाह आदि कार्य नहीं होते हैं।

इन चार महीनों में केवल धार्मिक अनुष्ठान ज्यादा होते हैं। 20 जुलाई से 15 नंबर तक चातुमार्स शुरू होने से हिन्दू मान्यता के अनुसार चार माह तक शहनाई नहीं बजेगी। श्री महादेव गिरि संस्कृत महाविद्यालय, प्राचार्य डॉ. नवीन चन्द्र जोशी ने बताया कि 15 नवम्बर तक चातुर्मास रहेगा। तब तक मांगलिक कार्य बन्द रहेंगे।

वहीं 15 नवम्बर को तुलसी विवाह के बाद मांगलिक कार्य आरम्भ होगें। पंचाग के अनुसार नंवबर में 4 और दिसंबर में 8 विवाह के शुभ मुहूर्त हैं। इसके बाद अलगे साथ मकर सक्रांति के बाद शादी के लग्न शुरू होंगे। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा आज सर्वार्थ सिद्धि योग में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। आज के दिन गुरु को देवता मानकर पूजा की जाती है। चातुर्मास के दौरान साधू-संत आदि यात्री नहीं करते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने से चातुर्मास शुरू हो जाता है।

इस वर्ष विवाह के शुभ मुहूर्त
नवंबर माह – 21,28,29 30
दिसंबर माह – 1,6,7,8,9,11,13,15

 

 

 

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