हल्द्वानी: बढ़ते हादसों की रोकथाम के लिए खुलेंगी चार ट्रैफिक पुलिस लाइन

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गौरव पांडेय, हल्द्वानी। सड़क हादसों और एमवी एक्ट के तहत अपराधों को देखते हुए राज्य में चार नई ट्रैफिक पुलिस लाइन खोलने की योजना है। देहरादून के डोईवाला में, नैनीताल के हल्द्वानी में, ऊधमसिंहनगर के काशीपुर में, हरिद्वार के रोशनाबाद क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस लाइन की स्थापना हो सकती है। पुलिस मुख्यालय राज्य में ट्रैफिक …

गौरव पांडेय, हल्द्वानी। सड़क हादसों और एमवी एक्ट के तहत अपराधों को देखते हुए राज्य में चार नई ट्रैफिक पुलिस लाइन खोलने की योजना है। देहरादून के डोईवाला में, नैनीताल के हल्द्वानी में, ऊधमसिंहनगर के काशीपुर में, हरिद्वार के रोशनाबाद क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस लाइन की स्थापना हो सकती है। पुलिस मुख्यालय राज्य में ट्रैफिक पुलिस लाइन की स्थापना के लिए प्रस्ताव तैयार करने में जुटा है।

कमोवेश प्रदेश के अन्य शहरों की तरह ही इन चार शहरों में भी यातायात का दबाव बढ़ता जा रहा है। मैदान के इन शहरों में रोजाना हजारों वाहन सीज किए जाते हैं। यातायात कार्यालय में स्थान की व्यवस्था न होने से इन वाहनों को थानों-चौकियों में खड़ा कर दिया जाता है। इससे थाना-चौकियों में जगह की कमी के चलते अव्यवस्था रहती है। जबकि खुले आसमान के नीचे धूप, हवा, पानी में वाहन जल्द खराब हो जाते हैं। लेकिन अब राज्य में ट्रैफिक पुलिस लाइन अस्तित्व में आने वाली हैं। इससे अव्यवस्थाओं से छुटकारा मिलेगा। पुलिस मुख्यालय ने इन शहरों में पुलिस ट्रैफिक लाइन स्थापित करने की योजना बनाई है। ट्रैफिक लाइन बनने से थाना-चौकियों पर वाहनों का दबाव कम होगा।

यातायात पुलिस कर्मी और विशेषज्ञों की होंगी भर्तियां
हल्द्वानी। प्रदेश में यातायात पुलिस की भारी कमी है। यातायात पुलिस मानकों की एक चौथाई भी नहीं है। मानकों के अनुसार राज्य में 29 सौ यातायात पुलिस कर्मी होने चाहिए। लेकिन वर्तमान में 594 ही यायातात पुलिस कर्मी हैं। जबकि राज्य में 28 लाख से अधिक पंजीकृत वाहन है। इधर, अब यातायात की कमान पुलिस के निदेशालय के पास चली गई है। निदेशालय प्रदेश की यातायात व्यवस्था को और मजबूत करना चाहता है। इसके लिए जल्द ही यातायात पुलिस के खाली पदों को भर्ती के जरिये भरा जाएगा। विशेषज्ञों की भी भर्ती होगी। इन्हें ट्रैफिक पुलिस लाइन में ही प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती पर आई ट्रैफिक लाइन की सुध
हल्द्वानी। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रैफिक थानों को लेकर निर्देश जारी किए थे। सर्वोच्च अदालत ने हर 50 किलोमीटर के अंतराल पर एक ट्रैफिक थाना खोलने को कहा था। ताकि यातायात नियमों का उल्लंघन होने से रोका जा सके और दुर्घटनाओं की रोकथाम हो। लेकिन उत्तराखंड की परिस्थितियों के अनुसार यहां पर थाना खोलना संभव नहीं है। लिहाजा पुलिस लाइन पर विचार किया गया। दरअसल थाना खोलने में अच्छा खासा बजट खर्च होता है। जबकि ट्रैफिक पुलिस लाइन तैयार कराने में इससे कम खर्च आएगा। लाइन में थानों की भांति ही गतिविधियां हो सकती हैं।

भूमि चयन को लेकर करनी होगी कसरत
ट्रैफिक पुलिस लाइन को सरकार और पुलिस मुख्यालय हरी झंडी दिखा चुका है। यह तय है कि आने वाले समय में पुलिस लाइनें खोल दी जाएंगी। लेकिन इससे पहले लाइन स्थापना के लिए भूमि चयन और बंदोबस्त को लेकर खासी कसरत करनी पड़ेगी। लाइन के लिए बड़ी मात्रा में भूमि की दरकार होगी।

यायायात संबंधी गतिविधियों को संचालित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस लाइन की स्थापना कारगर रहेगी। इससे सिविल थानों में यातायात का दबाव कम होगा। प्रदेश के चार शहरों में ट्रैफिक लाइन का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।-अशोक कुमार, डीजीपी, उत्तराखंड

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