बरेली: बच्चे अगली कक्षा में बढ़े पर मानसिक विकास रुका
बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में स्कूलों के बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई को बहुत नुकसान पहुंच रहा है। बच्चे अगली कक्षा में तो बढ़ रहे हैं लेकिन उनका मानसिक विकास नहीं हो पा रहा। ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर सिर्फ सिलेबस पूरा कराने की खानापूर्ति चल रही है। बिन परीक्षा के पास होने …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में स्कूलों के बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई को बहुत नुकसान पहुंच रहा है। बच्चे अगली कक्षा में तो बढ़ रहे हैं लेकिन उनका मानसिक विकास नहीं हो पा रहा। ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर सिर्फ सिलेबस पूरा कराने की खानापूर्ति चल रही है। बिन परीक्षा के पास होने का असर बच्चों पर पड़ रहा है। यह कहना है कान्वेंट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों का।
अमृत विचार ने रविवार को स्कूलों के खोलने के संबंध में कई अभिभावकों की राय जानी। इस दौरान अभिभावक बच्चों की पढ़ाई ठप रहने से उनके भविष्य को लेकर चिंतित दिखे। बोले-तीसरी लहर आने की आशंका है लेकिन अब राज्य सरकार को कोविड नियमों का पालन कराते हुए स्कूल खुलवाने चाहिए। कक्षाओं में दो गज की दूरी का पालन कराते हुए बच्चों को बैठाने की व्यवस्था होनी चाहिए। अभिभावकों ने और क्या कहा, आईए जाने इनके विचार…

मेरे दो बच्चे हैं। दोनों बच्चे कान्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं। उनकी ऑनलाइन कक्षाएं चल रहीं हैं मगर उससे बच्चों को लाभ नहीं मिल रहा। फीस तो जमा करते जा रहे हैं। बच्चों को कुछ सीखने को नहीं मिल रहा। स्कूल खुलने चाहिए। -सरबर हुसैन, जगतपुर

मेरा बेटा विराट शर्मा राधा माधव स्कूल में पढ़ता है। बच्चे को लेकर बहुत चिंता में हूं। बच्चा स्कूल जाता था तो उसकी पढ़ने-लिखने की आदत बनी रहती थी मगर अब आदत नहीं रही। ऑनलाइन कक्षा के लिए मोबाइल दिया। कोविड नियमों के तहत स्कूल खुलने चाहिए। -प्रभा शर्मा, आशीष रायल पार्क

मेरी बेटी 11वीं में है। उसकी ऑनलाइन कक्षा चल रही है। स्कूल खुलने चाहिए क्योंकि बहुत से सवाल ऐसे होते हैं जो ऑनलाइन कक्षा में नहीं पूछे जा सकते। समय की भी कमी रहती है। बच्चों को पढ़ने के लिए सही माहौल नहीं मिल पा रहा है। स्कूल खुलने पर ही सही तरह से पढ़ाई हो सकेगी। -सुनीता देवी, लालफाटक

मेरी बेटी दूसरी कक्षा में है। पहली कक्षा में तो उसे पास कर दिया था। उसने अभी तक स्कूल का मुंह भी नहीं देखा। छोटे बच्चे ऑनलाइन क्लास में ठीक से नहीं समझ पाते मगर क्या करें, बेटी का स्वस्थ रहना भी जरूरी है और तीसरी लहर में तो बच्चों को ही ज्यादा खतरा है। -वीरेंद्र गंगवार, राजेंद्र नगर

मेरा बेटा 12वीं में है और बेटी 10वीं में। करीब डेढ़ साल से बच्चे स्कूल नहीं गए हैं। अभी तो बिना परीक्षा के पास कर दिए गए मगर ऐसा कब तक चलेगा। ऐसी पढ़ाई का फायदा नहीं है। स्कूल में पढ़ाई होने से बच्चों का मानसिक विकास होता है। सरकार को स्कूल खोलने चाहिए। -नीलू शर्मा, दुर्गा नगर

मेरी दो बेटियां चिकर इंटरनेशनल स्कूल में 9वी और 6वीं क्लास में पढ़ती हैं। बच्चे मोबाइल में ज्यादा व्यस्त रहते हैं। ऑनलाइन क्लास में बस खानापूर्ति होती है। कोरोना नियम को ध्यान में रखते हुए अगर स्कूल खोले जाएं तो कोई गलत नहीं है। -रिचा अरोरा, मॉडल टाउन

मेरा बेटा शशांक जीआरएम में 12वीं का छात्र है। इस बार उसका बोर्ड है मगर कोरोना की वजह से स्कूल बंद चल रहे हैं। उसकी पढ़ाई को लेकर चिंतित हूं। कोविड नियमों के अनुसार स्कूल को खोला जाना चाहिए। वैसे भी बच्चों की पढ़ाई का काफी नुकसान हो चुका है। -रतन कुमार, कोहाड़ापीर

छोटे बच्चों को छोड़कर बाकी सभी बच्चों के स्कूल खुलने चाहिए। हां, स्कूल में कोरोना नियमों का पालन होना चाहिए। कोरोना तो पता नहीं कब तक रहेगा मगर स्कूल ऐसे ही बंद रहे तो बच्चों का बहुत नुकसान होगा। बच्चे क्लास में तो आगे बढ़ रहे हैं मगर ज्ञान में वह उसी जगह पर हैं। -नीतू शर्मा, डोहरा मोड़
अभिभावक न घबराएं, बच्चों को भी सितंबर से लगेगी वैक्सीन
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईएसीआर) के चौथे सीरो सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 16 अगस्त से पहले प्राइमरी स्कूल खोले जा सकते हैं। सितंबर में सेकेंड्री स्कूल भी वैक्सीन पहुंचने पर कोविड प्रोटोकाल को ध्यान में रख खुल सकते हैं। इस पर सरकार को विचार करने की जरूरत है। यह कहना है कि वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. अतुल अग्रवाल का। अक्टूबर के बीच कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका पर विराम लगाते हुए उन्होंने कहा कि अगर सितंबर से बच्चों को वैक्सीन लगनी शुरू हो जाएगी, जिससे महामारी का टलना तय है। कोरोना की वर्तमान की स्थिति को देखते हुए क्लास में बच्चों की संख्या अधिक होने पर दो क्लासों में बांटकर पढ़ाया जाना चाहिए। बच्चों के संपर्क में आने वाले उनके अभिभावक से लेकर शिक्षक समेत सभी सपोर्ट स्टाफ पूरी तरह वैक्सीनेटेड होने चाहिए। इसका प्रमाण स्कूल में जमा कराया जाए।
