नैनीताल: हाइकोर्ट ने नियामतपुर ग्राम सभा के मामले में पंचायती राज विभाग से छह सप्ताह में निर्णय लेने को कहा

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हरिद्वार के लक्सर तहसील के मिर्जापुर सादाब गांव के पुनर्गठन के मामले में याचिकाकर्ता को निदेशक पंचायती राज को प्रस्ताव सौंपने के निर्देश दिये हैं। मामले को गांव के ही याचिकाकर्ता पवन सिंह की ओर से चुनौती दी गयी है। इस प्रकरण की सुनवाई सोमवार को न्यायमूर्ति मनोज …

नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हरिद्वार के लक्सर तहसील के मिर्जापुर सादाब गांव के पुनर्गठन के मामले में याचिकाकर्ता को निदेशक पंचायती राज को प्रस्ताव सौंपने के निर्देश दिये हैं। मामले को गांव के ही याचिकाकर्ता पवन सिंह की ओर से चुनौती दी गयी है। इस प्रकरण की सुनवाई सोमवार को न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मिर्जापुर सादाब एवं नियामतपुर पूर्व में पृथक-पृथक ग्राम सभायें थीं, लेकिन उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के तहत 1994 में दोनों ग्राम सभाओं का विलय कर दिया गया।

नयी ग्राम सभा मिर्जापुर सादाब के नाम से जाने जाने लगी। तभी से दोनों एक ग्रामसभायें एक ही चली आ रही हैं। याचिकाकर्ता की ओर से आगे मांग की गयी कि नियामतपुर को पृथक ग्राम सभा घोषित किया जाये और इसके लिये नियामतपुर सभी प्रकार के मापदंडों को पूरा करता है। जनसंख्या के मानक पर भी उनकी ग्राम सभा खरी उतरती है। सरकार की ओर से कहा गया कि 1994 में दोनों ग्राम सभाओं का स्वेच्छा से विलय किया गया था।

अधिवक्ता अजयवीर पुंडीर ने कहा कि मामले को सुनने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को निदेशक पंचायती राज को एक सप्ताह के अंदर प्रत्यावेदन सौंपने के निर्देश दिये हैं। साथ ही निदेशक को छह सप्ताह के अंदर प्रत्यावेदन को निस्तारित करने को कहा है।

संबंधित समाचार