बरेली: मोबाइल कर लिए बंद, मरीजों को लेना पड़ा निजी वाहनों का सहारा
बरेली, अमृत विचार। तीन दिन से जारी धरने के बाद भी सरकार ने 108, 102 एंबुलेंस कर्मियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आक्रोशित चालकों ने सेवाएं ठप कर दीं। चालकों ने सोमवार को सरकार के खिलाफ रोड प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की। हड़ताल के कारण मरीज बेहद परेशान रहे। घायल रेफर होने …
बरेली, अमृत विचार। तीन दिन से जारी धरने के बाद भी सरकार ने 108, 102 एंबुलेंस कर्मियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आक्रोशित चालकों ने सेवाएं ठप कर दीं। चालकों ने सोमवार को सरकार के खिलाफ रोड प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की। हड़ताल के कारण मरीज बेहद परेशान रहे। घायल रेफर होने वाले मरीजों को जहां एंबुलेंस लेने नहीं पहुंचीं, वहीं मृतक के शव परिजन प्राइवेट वाहन से लेकर गए। एंबुलेंस एसोसिएशन संघ ने कहा कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी, वह हड़ताल जारी रखेंगे। मरीजों को हो रहे परेशानी के लिए वे नहीं बल्कि इसके लिए शासन व प्रशासन जिम्मेदार है।
एंबुलेंस कर्मचारी संघ का आरोप है कि नई कंपनी की ओर से एएलएस के हजारों कर्मचारियों को प्रदेश भर से निकाला जा रहा है। एएलएस अपने कर्मियों को जो वेतन देती थी। नई कंपनी उससे कम वेतन पर काम दे रही है इसलिए इसका विरोध करने के लिए हड़ताल की गई है। इसको लेकर प्रदेश भर में एंबुलेंस कर्मी बीते तीन दिनों से शांतिपूर्वक विरोध कर रहे थे। लेकिन जब बात नहीं बनी तो मजबूरी में रविवार की आधी रात से एंबुलेंस के पहिए को रोककर बरेली मोड़ स्थित मैदान में खड़ी कर दी। अपने-अपने मोबाइल भी बंद कर लिए।
कहा कि कोविड-19 की विषय परिस्थिति में एंबुलेंस कर्मियों ने अपनी जान पर खेलकर लोगों की जान बचाई थी इसलिए यह विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक हमारी सभी मांगें नहीं पूरी हो जाती हैं। इधर सीएमओ डा. एसपी गौतम का कहना है कि एंबुलेंस चालकों की मांग शासन स्तर तक पहुंचा दी है। शासन से ही इस संबंध में निर्णय लिया जाना है। हड़ताल के दौरान गंभीर मरीजों को असुविधा न हो, इसके लिए एंबुलेंस उपलब्ध करा दी गई थी।
