डाकघर बचत स्कीमों में पड़ी है 12 हजार करोड़ की दावाविहीन रकम

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

संजय सिंह, नई दिल्ली, अमृत विचार। डाकघर बचत खातों में 12 हजार करोड़ की ऐसी रकम पड़ी है जिसका कोई दावेदार नहीं है। तमाम खोजबीन के बाद डाक विभाग महज छह-सात सौ खातेदारों की थोड़ी सी रकम उन्हें लौटा पाया है। जी हां, भारतीय डाकघरों में पोस्ट आफिस सेविंग बैंक एकाउंट्स तथा पोस्ट ऑफिस सेविंग …

संजय सिंह, नई दिल्ली, अमृत विचार। डाकघर बचत खातों में 12 हजार करोड़ की ऐसी रकम पड़ी है जिसका कोई दावेदार नहीं है। तमाम खोजबीन के बाद डाक विभाग महज छह-सात सौ खातेदारों की थोड़ी सी रकम उन्हें लौटा पाया है।

जी हां, भारतीय डाकघरों में पोस्ट आफिस सेविंग बैंक एकाउंट्स तथा पोस्ट ऑफिस सेविंग सर्टिफिकेट्स की 12,037 करोड़ रुपये की ऐसी भारीभरकम राशि पड़ी है जिसका कोई दावेदार नहीं है। इनमें पोस्ट ऑफिस सेविंग बैंक सर्टिफिकेट्स से संबंधित 1.02 करोड़ खाते परिपक्व या मेच्योर हो चुके हैं। लेकिन इनकी 5,476 करोड़ रुपये की रकम का दावा करने अथवा उसे निकालने के लिए अब तक कोई भी सामने नहीं आया है।

डाकघर बचत खातों व प्रमाणपत्रों के पैसों का नियंत्रण वित्त मंत्रालय के पास है और वो ही इन पैसों का निवेश कर उससे प्राप्त लाभ को नियमानुसार खातेदारों में वितरित करता है। बिना दावे की उक्त रकम को बेकार पड़ा देख मंत्रालय इसका उपयोग वरिष्ठ नागरिकों या बुजुर्गों के कल्याण में करने लगा है। लेकिन संसदीय समिति ने इस पर नाखुशी जताई है। साथ ही सरकार को ताकीद की है कि उसे इन पैसे का उपयोग बुजुर्ग कल्याण में करने के बजाय इसके वास्तविक हकदारों को खोजकर उन्हें लौटाना चाहिए।

जहां तक डाक विभाग की बात है तो संचार मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इस महकमे ने खुद अपनी ओर से उक्त खातेदारों व प्रमाणपत्र धारकों की तलाश के कोई खास प्रयास नहीं किए हैं। क्योंकि यदि दिए गए पतों पर संपर्क किया गया होता तो ज्यादातर दावेदार मिल ही जाते। परंतु 30 सितंबर, 2019 तक करोड़ों खातेदारों व प्रमाणपत्र धारकों में से विभाग मात्र 201 लोगों का पता लगा पाया था। जबकि इन्हें लौटाई गई रकम सिर्फ 55.99 लाख रुपये थी।

समिति ने डाक घर बचत योजनाओं के पैसे के प्रति सरकार के रवैये को पूर्णतया अनुचित और अनैतिक करार देते हुए डाक विभाग की भर्त्सना की है। साथ ही इस बात पर हैरानी जताई है कि उसके यहां इतनी बड़ी संख्या में दावाविहीन निष्क्रिय खाते पड़े होने के बावजूद उसने इनके वास्तविक दावेदारों का पता लगाने के गंभीर प्रयास नहीं किए।

मात्र 0.001 फीसद से भी कम रकम के दावेदारों का पता लगा पाना स्पष्ट रूप से विभाग की लापरवाही को साबित करता है। समिति ने विभाग से डाकघर बचत स्कीमों की मैच्योरिटी से अनभिज्ञ अथवा उन्हें भूल चुके खातेदारों एवं प्रमानपत्रधारकों अथवा कानूनी उत्तराधिकारियों का पता लगाकर उन्हें उनकी रकम सौंपने की हिदायत तो दी ही है।

साथ ही ऐसी गड़बड़ी दुबारा न हो ये सुनिश्चित करने के लिए नए खातेदारों तथा प्रमाणपत्र धारकों का केवाईसी (‘नो योर कस्टमर’ यानी नाम, पता, मोबाइल, पैनकार्ड और आधार नंबर समेत ग्राहक के बारे में पूरी जानकारी) रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा है।

समिति की सख्ती के बाद डाक विभाग कुछ ऐक्शन में आया है। और उसने दावेदारों का पता लगाने के लिए अभियान तेज किया है। इसके तहत डाक विभाग की वेबसाइट पर सभी दावेदारों का ब्यौरा प्रकाशित किया गया है। साथ ही डाकियों से भी घर-घर जाकर दावेदारों का पता लगाने को कहा गया है।

नई मुहिम का फायदा भी दिखने लगा है। जिसके तहत 31 मार्च, 2020 तक 417 नए दावेदारों का पता लगाकर उनकी रकम उन्हें सौंपी गई थी। ये रकम कितनी थी, इसका विभाग ने कोई ब्यौरा नहीं दिया है।
इसी के साथ डाकघरों के आधुनिकीकरण कर उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी नेटवर्क एवं उपकरणों जैसे कि एमपीएलएस, वायरलेस, वीपीएन ब्रॉडबैंड एवं डोंगल्स से लैस कर उन्हें दोहरी कनेक्टिविटी प्रदान करने का काम भी तेज किया गया है। ताकि केवाईसी प्रक्रिया को पूरा किया जा सके।

Border Dispute: MHA बैठक में बनी सहमति, सुलझेगा असम-मिजोरम विवाद

संबंधित समाचार